
उज्जैन। नाली पर निर्माण हटाने के नाम पर नगर निगम की हथौड़ा कार्रवाई ने शहर में नाराजगी पैदा कर दी है। निगम अमले ने दुकानों और मकानों के सामने नाली पर बने चबूतरे, स्लैब और अन्य निर्माण तोड़ दिए। लोगों का सवाल है कि चौडीकरण और नाली निर्माण के बाद दूकानदारों और लोगों जब नगर निगम द्वारा कवर नालियों को व्यवस्थित करने के साथ आने-जाने के लिए चढाव बनाए तब निगम के जिम्मेदार अधिकारी कहां थे।
उस वक्त रोका क्यों नहीं अब बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के तोडफ़ोड़ कर लोगों को परेशानी में क्यों डाला जा रहा है? हाल में चौड़ीकरण किए गए क्षेत्रों में नालियों पर किए गए निर्माण को हटाने के लिए नगर निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई से नागरिकों और दुकानदारों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि शहर के विकास में चौड़ीकरण के लिए दुकान, मकान तोड़ दिए और अपनी जमीन दी। अब निगम आने-जाने के रास्ते को भी व्यवस्थित नहीं रखने देना चाहता है। निगम अमले ने कई क्षेत्रों में नाली के ऊपर बने चबूतरे, स्लैब और अन्य निर्माण को तोड़ दिया। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों और रहवासियों ने विरोध जताते हुए कहा कि यदि निर्माण नियम विरुद्ध थे तो इन्हें बनने से पहले ही क्यों नहीं रोका गया। अब अचानक कार्रवाई कर लोगों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि नालियों पर किए गए निर्माण के कारण सफाई और जल निकासी में परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियां ढंक जाने से सफाई कर्मचारी अंदर तक नहीं पहुंच पाते और बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित होती है। इसी के चलते निगम द्वारा नालियों को मुक्त कराने की कार्रवाई की जा रही है, वहीं दुकानदारों का कहना है कि नाली पर बने स्लैब और चबूतरे का निर्माण घरों और दुकानों तक पहुंचने के लिए किया था। निगम की कार्रवाई में इन्हें तोड़े जाने से दुकानों के सामने अव्यवस्था हो गई है। नागरिकों का कहना है कि नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था बेहतर होना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई समान रूप से होनी चाहिए। यदि कहीं निर्माण है तो उसे हटाया जाए, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि दुकानों और मकानों तक आने-जाने का रास्ता बाधित नहीं हो। लोगों ने निगम से मांग की है कि कार्रवाई के बाद नालियों को व्यवस्थित तरीके से ढंका जाए और पैदल आवाजाही के लिए उचित व्यवस्था की जाए।
लोगों का सवाल—पहले अनुमति किसने दी?
कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन स्थानों पर नाली के ऊपर निर्माण लंबे समय से मौजूद थे, वहां समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत था तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों ने उस समय रोक क्यों नहीं लगाई। अब अचानक तोडफ़ोड़ करने के बजाय निगम को पहले वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। लोगों ने निगम प्रशासन से मांग की है कि नाली से संबंधित कार्रवाई में पारदर्शिता बरती जाए। प्रभावित नागरिकों को उचित जानकारी देने के बाद ही कार्रवाई की जाए।