वाशिंगटन। दुनियाभर के ऊर्जा बाजार (Energy market) में एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच बढ़ते तनाव तथा अमेरिका के गल्फ कोस्ट की ओर बढ़ रहे चक्रवाती तूफान ‘इसायस’ के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इन परिस्थितियों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
ब्रेंट क्रूड का भाव 4.08 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 104.28 डॉलर पर बंद हुआ। शुक्रवार सुबह इसमें कुछ नरमी आई और कीमत करीब 103.6 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करती दिखी। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव बढ़कर 91.49 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। कारोबार के दौरान दोनों प्रमुख बेंचमार्क में किसी समय 5 डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेजी भी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल के पीछे दो प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं। पहली, अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका और दूसरी, चक्रवाती तूफान इसायस का अमेरिका के गल्फ कोस्ट की ओर बढ़ना। तूफान के कारण तेल रिफाइनरियों और आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ने की चिंता है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार में कुछ राहत दिखाई दी। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव तक ईरान पर सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
बातचीत की संभावनाओं के बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की कार्रवाई में 17 तेल टैंकरों के साथ कुछ व्यक्तियों और नेटवर्क को निशाना बनाया गया है।
इसी बीच फ्रांस और सऊदी अरब यानबू तेल टर्मिनल की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल की संभावनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया भी सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य सहायता देने पर विचार कर रहा है। इन घटनाक्रमों के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के आठवें महीने में पहुंचने के साथ मालवाहक जहाजों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने ईरानी हमलों में वृद्धि को लेकर चिंता जताई है। संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने तेल भंडार तेजी से जारी करने का फैसला किया है, ताकि बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और पेट्रोल-डीजल की किल्लत का जोखिम कम करने में मदद मिल सके।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ सकता है। हालांकि, क्रूड के दाम बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। खुदरा कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान के अलावा रुपये की विनिमय दर, कर, तेल कंपनियों की लागत और मूल्य निर्धारण संबंधी फैसलों का भी असर पड़ता है।
यदि अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। ऐसी स्थिति में भारत में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालने से पहले आगे के बाजार रुझान और घरेलू मूल्य निर्धारण के फैसलों पर नजर रखना जरूरी होगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved