
नई दिल्ली । भारतवंशी नवनीतम नावी पिल्लई को (To Bharatvanshi Navneetam Navi Pillai) नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया (Nobel Peace Prize Awarded) । उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के लिए यह सम्मान दिया गया । दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं पिल्लै ने रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले नेल्सन मंडेला सहित कई लोगों का कानूनी बचाव किया था। उन्होंने युद्ध अपराध और नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में भी अहम काम किया है।
नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने नावी पिल्लई को अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया है। उनके काम का प्रमुख उद्देश्य गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना और मानवाधिकारों की रक्षा करना रहा है। नोबेल कमेटी के अनुसार, पिल्लई ने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में अभियोजन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि कानून और न्यायिक संस्थाएं हिंसा, भेदभाव और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ किस तरह काम कर सकती हैं।
नावी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन के क्लेयरवुड इलाके में हुआ था। उनका परिवार भारतीय तमिल मूल का है। वह ऐसे समय में बड़ी हुईं, जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की व्यवस्था के कारण गैर-श्वेत समुदायों को व्यापक भेदभाव का सामना करना पड़ता था। पिल्लई ने कानून की पढ़ाई की और आगे चलकर मानवाधिकारों की रक्षा को अपने करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में वकालत करते हुए रंगभेद का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं का बचाव किया। बाद में वह देश की न्यायपालिका और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में शीर्ष पदों तक पहुंचीं।
नावी पिल्लई का करियर केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर में उन लोगों का कानूनी पक्ष रखा, जो भेदभावपूर्ण व्यवस्था का विरोध कर रहे थे। वर्ष 1967 में उन्होंने नटाल प्रांत में अपनी वकालत शुरू की और वहां अपनी लॉ प्रैक्टिस शुरू करने वाली पहली महिला बनीं। 1995 में उन्हें दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में कार्यवाहक न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली अश्वेत महिला न्यायाधीश बनीं। यह उपलब्धि ऐसे दौर में आई, जब देश रंगभेद की व्यवस्था से बाहर निकलकर नए लोकतांत्रिक दौर में प्रवेश कर रहा था।
नावी पिल्लई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकारों के लिए काम किया है। जुलाई 2008 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में नियुक्त करने की पुष्टि की थी। उन्होंने 1 सितंबर 2008 से इस पद की जिम्मेदारी संभाली और 2014 तक इस भूमिका में रहीं। इस पद पर रहते हुए उनका काम दुनिया भर में मानवाधिकारों के संरक्षण और उल्लंघनों पर ध्यान दिलाने से जुड़ा था। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों सहित कई मानवाधिकार मुद्दों पर काम किया।
नावी पिल्लई महिलाओं के अधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन इक्वेलिटी नाउ की सह-संस्थापकों में शामिल हैं। यह संगठन महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को बढ़ावा देने तथा लैंगिक भेदभाव के खिलाफ काम करता है। उनके काम का दायरा महिलाओं के अधिकारों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बच्चों, हिरासत में रखे गए लोगों, यातना और घरेलू हिंसा के पीड़ितों तथा अन्य मानवाधिकार मुद्दों से जुड़े प्रयासों में भी योगदान दिया है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved