
नई दिल्ली। सोना (Gold), चांदी (silver) और प्लैटिनम (Platinum) खरीदने वालों के लिए आयात से जुड़े टैक्स नियमों (Tax Rules) में बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार (Central Government) ने बैंकों और अधिकृत एजेंसियों को कीमती धातुओं के आयात पर मिलने वाली अग्रिम IGST छूट समाप्त कर दी है। अब आयात के दौरान कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3 प्रतिशत इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) का भुगतान करना होगा। हालांकि, इस बदलाव का सीधा मतलब यह नहीं है कि बाजार में सोना-चांदी भी 3 प्रतिशत महंगा हो जाएगा। कीमतों पर असर आयात की लागत, अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव और कारोबारियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, बैंक 1 अप्रैल 2026 से ही यह टैक्स चुका रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इस बदलाव की जानकारी दी थी।
पहले क्या नियम था, अब क्या बदला?
साल 2017 में सोने के आयात पर बैंकों को अग्रिम IGST भुगतान से छूट दी गई थी। बाद में इस सुविधा का दायरा बढ़ाकर दूसरी कीमती धातुओं को भी इसमें शामिल कर लिया गया। इसके तहत बैंक और अधिकृत एजेंसियां आयात के समय IGST का अग्रिम भुगतान किए बिना सोना, चांदी और प्लैटिनम मंगा सकती थीं।
अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। इसके बाद बैंकों और संबंधित आयातकों को कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3 प्रतिशत IGST का भुगतान करना होगा। यानी आयात के दौरान ही टैक्स चुकाने के लिए उन्हें पर्याप्त रकम का इंतजाम करना पड़ेगा।
सरकार ने क्यों खत्म की टैक्स छूट?
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य कीमती धातुओं के आयात के अलग-अलग माध्यमों के बीच टैक्स व्यवस्था में समानता लाना है। पहले बैंकों के जरिए आयात करने वालों को अग्रिम टैक्स भुगतान के मामले में विशेष राहत मिलती थी। अब इस अंतर को कम करने की कोशिश की गई है।
गुजरात के GIFT सिटी स्थित इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) जैसे संगठित प्लेटफॉर्म भी कीमती धातुओं के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार की मंशा है कि केवल आयात के माध्यम के आधार पर किसी एक श्रेणी के कारोबारियों को टैक्स संबंधी विशेष लाभ न मिले और सभी के लिए व्यवस्था अधिक समान हो।
बैंकों और आयातकों पर क्या पड़ेगा असर?
इस बदलाव का शुरुआती असर बैंकों और आयातकों की नकदी व्यवस्था पर पड़ सकता है। पहले जिन मामलों में आयात के समय अग्रिम IGST नहीं देना पड़ता था, अब वहां कस्टम्स क्लीयरेंस के दौरान टैक्स चुकाने के लिए अतिरिक्त रकम की जरूरत होगी।
पात्र कारोबारियों को नियमानुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए भुगतान किए गए टैक्स का लाभ मिल सकता है। लेकिन टैक्स पहले चुकाना होगा और उसका समायोजन बाद में हो सकता है। इस बीच कारोबारियों की कुछ पूंजी अस्थायी रूप से फंसी रह सकती है।
बड़े पैमाने पर सोना-चांदी आयात करने वाले बैंकों को अपनी कार्यशील पूंजी बढ़ानी पड़ सकती है। यदि इसके लिए अतिरिक्त फंड जुटाना पड़े, तो उनकी वित्तीय लागत भी बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित आयातक अपनी नकदी और टैक्स क्रेडिट का प्रबंधन किस तरह करते हैं।
क्या ग्राहकों को सोना-चांदी 3% महंगा मिलेगा?
आम खरीदारों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि क्या अब सोना और चांदी खरीदने के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे। फिलहाल केवल अग्रिम IGST छूट समाप्त होने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों धातुओं की खुदरा कीमतें सीधे 3 प्रतिशत बढ़ जाएंगी।
सोने-चांदी के दाम कई कारकों से तय होते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात पर लागू अन्य शुल्क, घरेलू मांग और कारोबारियों की लागत शामिल हैं। हालांकि, टैक्स का भुगतान पहले करने से आयातकों की नकदी पर दबाव बढ़ सकता है। यदि इससे उनकी वित्तीय लागत बढ़ती है, तो वे अतिरिक्त खर्च का कुछ हिस्सा अपने मार्जिन या कीमतों के जरिए आगे बढ़ा सकते हैं। इसका अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कारोबारियों पर लागत कितनी बढ़ती है और वे उसका कितना हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाते हैं।
त्योहारों और शादी के सीजन में क्यों अहम है बदलाव?
भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह के दौरान सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में आयात की लागत और बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव खरीदारों के बजट को प्रभावित कर सकता है। कीमती धातुओं का आयात देश के विदेशी मुद्रा खर्च और व्यापार घाटे से भी जुड़ा है। ऐसे में सरकार की ओर से आयात के अलग-अलग माध्यमों पर समान टैक्स व्यवस्था लागू करने का फैसला कारोबारियों के साथ-साथ बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आम खरीदार खरीदारी से पहले क्या ध्यान रखें?
खरीदारों को सिर्फ टैक्स छूट समाप्त होने की खबर के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सोना-चांदी तत्काल 3 प्रतिशत महंगा हो जाएगा। खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में सोने या चांदी का भाव, आभूषणों के मेकिंग चार्ज और बिल में लागू टैक्स की जानकारी जरूर जांचें। कुल मिलाकर, इस बदलाव से आयात के समय टैक्स भुगतान की व्यवस्था बदली है। खुदरा कीमतों पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह आयातकों की बढ़ी लागत, बाजार की परिस्थितियों और कारोबारियों की मूल्य निर्धारण नीति से तय होगा।
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