लाहौर। पाकिस्तान में ईशनिंदा (Blasphemy in Pakistan) के आरोप को लेकर एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। लाहौर के पास शेखूपुरा (Sheikhupura) जिले के घड़ियाल कलां गांव में भीड़ ने एक ईसाई व्यक्ति के घर और दवा की दुकान में आग लगा दी। घटना के बाद सुरक्षा को लेकर भयभीत ईसाई समुदाय के 35 से ज्यादा परिवारों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। पुलिस ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। मामले में आरोपी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, ताकि भीड़ उसे नुकसान न पहुंचा सके।
यह घटना गुरुवार को लाहौर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित घड़ियाल कलां गांव में हुई। पुलिस के अनुसार, 40 वर्षीय कमरान गुल मसीह पर सोशल मीडिया के माध्यम से ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री साझा करने का आरोप लगाया गया था। इस आरोप के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।
पुलिस अधिकारी जुबैर अब्बास ने बताया कि मसीह को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक सुरक्षित घर में रखा गया है। पुलिस को आशंका थी कि यदि वह भीड़ के हाथ लग गए, तो लोग उन्हें पीट-पीटकर मार सकते हैं।
पुलिस के मुताबिक, एक स्थानीय मस्जिद से लोगों को मसीह के घर के आसपास इकट्ठा होने की घोषणा की गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। भीड़ ने पहले मसीह के घर को आग के हवाले किया और फिर उनकी दवा की दुकान में भी आग लगा दी।
पुलिस अधिकारी जुबैर अब्बास ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को घटनास्थल पर भेजा गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
कमरान गुल मसीह के खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295-सी के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह प्रावधान पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से संबंधित आरोपों पर लागू होता है।
प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता रईस अहमद ने बताया कि वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि मसीह ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया है। आरोप है कि इस वीडियो को एक दिन पहले जॉन शाकी नाम के यूजर ने अपलोड किया था।
एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारी ने कथित वीडियो को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड किया। इसके बाद गवाहों की मौजूदगी में उसे यूएसबी ड्राइव में स्थानांतरित किया गया। पुलिस ने संबंधित सामग्री को सील कर जब्त कर लिया और वीडियो के स्क्रीनशॉट भी लिए।
मसीह के खिलाफ दर्ज मामले से अलग, पुलिस ने घर और दवा की दुकान में कथित तौर पर तोड़फोड़ करने तथा आग लगाने के मामले में पांच नामजद संदिग्धों और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस इस मामले में आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
इस तरह मामले में एक ओर ईशनिंदा के आरोप की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी ओर घर और दुकान में आगजनी तथा तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पाकिस्तान में ईशनिंदा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। देश में ईसाइयों और हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों को कई बार भेदभाव, धमकियों और हिंसक हमलों का सामना करना पड़ा है। ईशनिंदा के आरोपों के बाद भीड़ की हिंसा की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में आरोपों की न्यायिक जांच पूरी होने से पहले ही लोगों को निशाना बनाया गया है।
ऐसी घटनाओं में केवल आरोप या संदेह के आधार पर हिंसा भड़कने से निर्दोष लोगों की सुरक्षा और कानून के शासन को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
वर्ष 2021 में पाकिस्तान के पूर्वी औद्योगिक शहर सियालकोट में एक फैक्टरी में काम करने वाले श्रीलंकाई नागरिक की ईशनिंदा के संदेह में भीड़ ने हत्या कर दी थी। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सुर्खियां बटोरी थीं और पाकिस्तान में भीड़ की हिंसा तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई थी।
घड़ियाल कलां की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ईशनिंदा के आरोपों की जांच के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अल्पसंख्यक समुदायों को हिंसा से बचाने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
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