
भोपाल। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) को हटाने की मांग और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रविवार को नरसिंहपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। सीएम ने कहा कि राहुल गांधी सत्ता के लिए बेचैन हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं और उन पर देश के साथ गद्दारी जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे आरोप लगाने से पहले तथ्यों और प्रमाणों को सामने रखना चाहिए।
कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए सीएम यादव ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग से जुड़े पदों पर रहे व्यक्तियों को बाद में राजनीतिक अवसर दिए। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। इसी तरह केपीएस गिल को भी कांग्रेस सरकार के दौरान मंत्री बनाए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का आधार स्पष्ट करे।
सीएम ने कहा कि आजादी से पहले देश में करीब 600 रियासतें थीं। आजादी के बाद अनेक राजाओं और महाराजाओं ने राष्ट्रहित में अपने अधिकारों का त्याग किया। इसके विपरीत, कांग्रेस की राजनीति धीरे-धीरे एक परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित होती चली गई। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम लेते हुए कांग्रेस पर परिवार केंद्रित राजनीति करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि जब चुनावी प्रक्रिया के तहत केरल में कांग्रेस को राजनीतिक सफलता मिलती है, तब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर इसी तरह सवाल नहीं उठाए जाते। उन्होंने सवाल किया कि यदि चुनावी प्रक्रिया कांग्रेस की सरकार बनाने में भूमिका निभाती है, तो चुनाव के समय ही आयोग पर सवाल क्यों खड़े किए जाते हैं? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना अधिकार का हिस्सा है, लेकिन आरोप तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर लगाए जाने चाहिए। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाने से पहले उनकी पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य सामने रखना जरूरी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक दल को अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं है।
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