
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क (Elon Musk) भारत (India) में अपनी कंपनी स्टारलिंक (Starlink Company) की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं (Satellite internet services) शुरू करना चाहते हैं। इसके लिए कंपनी नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रही है। इस बीच भारत में कारोबार और प्रतिस्पर्धा को लेकर उठ रहे सवालों के साथ-साथ अमेरिका में मस्क के राजनीतिक चंदे पर भी बहस तेज हो गई है।
अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने आरोप लगाया है कि मस्क राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में फायदा पहुंचाने के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। सैंडर्स ने अरबपतियों के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी अभियानों में भारी आर्थिक योगदान देने से अमीर लोगों का राजनीति और सरकारी नीतियों पर प्रभाव बढ़ सकता है।
ट्रंप की जीत के बाद मस्क की संपत्ति बढ़ने का दावा
सैंडर्स के मुताबिक, मस्क ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत के लिए करीब 29 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद मस्क की संपत्ति में 696 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। सैंडर्स ने यह भी कहा कि मस्क अब दुनिया के पहले खरबपति बन गए हैं।
सैंडर्स ने 3 नवंबर को होने वाले 2026 के मध्यावधि चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मस्क रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद के लिए 36.6 करोड़ डॉलर खर्च कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘मस्क को रोको, कुलीनतंत्र को रोको।’
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अमेरिकी चुनाव चक्र में मस्क की ओर से करीब 36.6 करोड़ डॉलर का राजनीतिक चंदा दिया गया है। इसमें जुलाई के बाद से दिए गए कम से कम 27.6 करोड़ डॉलर शामिल हैं।
रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कहां खर्च हुई रकम?
मस्क के राजनीतिक चंदे का बड़ा हिस्सा ऐसे संगठनों को मिला है, जो अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों सीनेट और प्रतिनिधि सभा के चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मस्क ने रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों के समर्थन में काम करने वाले सीनेट लीडरशिप फंड को 15.8 करोड़ डॉलर दिए। वहीं, उनके अपने राजनीतिक संगठन अमेरिका पीएसी को 7.6 करोड़ डॉलर का योगदान दिया गया। इसके अलावा, प्रतिनिधि सभा के चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले कांग्रेसनल लीडरशिप फंड को भी 2 करोड़ डॉलर दिए गए।
इन संगठनों को मिले चंदे के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी चुनावों में बड़े दानदाताओं की आर्थिक भूमिका कितनी अहम हो सकती है। हालांकि, किसी संगठन को दिया गया राजनीतिक चंदा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उससे चुनाव का नतीजा तय हुआ।
मध्यावधि चुनाव में दोनों पार्टियों के सामने चुनौती
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों को ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव और उनकी पार्टी की स्थिति की अहम परीक्षा माना जा रहा है। इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में दोबारा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रही है।
ईरान के साथ युद्ध के बाद बने हालात भी अमेरिकी राजनीति और चुनावी बहस का हिस्सा हैं। ऐसे माहौल में बड़े कारोबारियों की ओर से राजनीतिक दलों और चुनावी संगठनों को दिए जाने वाले चंदे पर चर्चा और तेज हो गई है।
क्या है कुलीनतंत्र, जिस पर सैंडर्स ने उठाए सवाल?
कुलीनतंत्र को अंग्रेजी में ओलिगार्की कहा जाता है। यह ऐसी व्यवस्था है, जिसमें राजनीतिक शक्ति कुछ गिने-चुने अमीर या प्रभावशाली लोगों के हाथों में केंद्रित हो जाती है। बर्नी सैंडर्स लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि अरबपतियों की विशाल संपत्ति उन्हें चुनावों और सरकारी नीतियों पर आम नागरिकों की तुलना में अधिक प्रभाव डालने का अवसर देती है।
इस आलोचना का प्रमुख आधार चुनावी अभियानों में बड़े आर्थिक योगदान की भूमिका है। कोई बेहद अमीर व्यक्ति बड़ी रकम खर्च करके विज्ञापन, प्रचार और मतदाताओं तक पहुंच बनाने वाले प्रयासों को वित्तीय मदद दे सकता है। इससे बड़े दानदाताओं के समर्थन वाले उम्मीदवारों और मुद्दों को बढ़त मिलने की संभावना पैदा होती है।
मस्क के राजनीतिक चंदे को लेकर सैंडर्स की आपत्ति भी इसी मुद्दे से जुड़ी है। उनका तर्क है कि जब कुछ अरबपति चुनावी राजनीति में बहुत बड़ी रकम लगाते हैं, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम लोगों की आवाज और प्रभाव कमजोर पड़ सकता है। यह सैंडर्स की राजनीतिक आलोचना है; इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन चुनावी खर्च, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और चुनाव परिणामों सहित अन्य तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
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