
नई दिल्ली ।अमेरिका (America) में महिलाओं के लिए गुस्सा व्यक्त करने और अपनी भावनाओं को समझने के उद्देश्य से विशेष शिविर (Camps) आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में प्रतिभागियों को ऐसी जगह उपलब्ध कराई जाती है, जहां वे बिना किसी डर या दूसरों के फैसले की चिंता किए अपनी भावनाएं(Emotions) जाहिर कर सकें। ओरेगन (Oregon) के जंगलों में आयोजित होने वाले ऐसे ही एक शिविर में महिलाएं पेड़ों के बीच एकत्र होती हैं और आवाज निकालने से लेकर शारीरिक गतिविधियों(Physical Activities) तक के जरिए खुद को अभिव्यक्त करती हैं। इन कार्यक्रमों में छोटे समूह बनाए जाते हैं, ताकि प्रत्येक प्रतिभागी को पर्याप्त सहयोग मिल सके।
पोर्टलैंड के पास ओरेगन के जंगलों में एमी आर्मस्ट्रांग का होली रेज रिट्रीट इसी उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। यहां एक समूह में अधिकतम 10 महिलाओं को शामिल किया जाता है। जब समूह की कोई महिला चीखती है, तो दूसरी महिलाओं को भी ऐसा करने की अनुमति और प्रोत्साहन मिलता है। सत्र के बाद सभी प्रतिभागी सामूहिक चर्चा करती हैं। इस दौरान लिखे गए पत्रों को जलाया जाता है और अंत में एक गीत के साथ कार्यक्रम पूरा होता है।
आर्मस्ट्रांग ने अगस्त 2025 में इन शिविरों की शुरुआत की थी। आधे दिन के सत्र की शुरुआत ध्यान अभ्यास से होती है। वह इस अभ्यास को शरीर को कविता के रूप में अनुभव करने की प्रक्रिया बताती हैं। इसके बाद प्रतिभागियों को अपनी आवाज के माध्यम से भावनाएं व्यक्त करने का अवसर दिया जाता है। इसमें इच्छा के अनुसार चीखना या गुर्राना भी शामिल है। इसके साथ शारीरिक गतिविधियां कराई जाती हैं। आयोजकों का उद्देश्य महिलाओं को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सुरक्षित और सहयोगपूर्ण माहौल उपलब्ध कराना है।
इन शिविरों की फीस कार्यक्रम की अवधि और सुविधाओं के अनुसार अलग-अलग है। आर्मस्ट्रांग साढ़े तीन घंटे के सत्र के लिए करीब 51,000 रुपये लेती हैं। वहीं, बे एरिया सीबीटी सेंटर में पांच दिन के शिविर का शुल्क लगभग 2,97,500 रुपये और सात दिन के कार्यक्रम का शुल्क करीब 3,82,500 रुपये है। इन पैकेजों में रहने, भोजन और थेरेपी सत्र शामिल हैं। लंबे समय तक चलने वाले कार्यक्रम में अतिरिक्त गतिविधियों और शिविर समाप्त होने के बाद सहायता की सुविधा भी दी जाती है।
एक अन्य विकल्प में एक से तीन दिन के शिविर के लिए लगभग 2,12,500 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। इसमें शामिल होने वाली महिलाओं को पहले एक प्रश्नावली भरनी होती है। इसके जरिए उनकी पसंद, कार्यक्रम की अवधि, अनुभव की तीव्रता और उन विषयों के बारे में जानकारी ली जाती है, जिन पर वे काम करना चाहती हैं। मई में आयोजित पहले शिविर में 16 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। आयोजकों ने अक्टूबर के अंत में दूसरा शिविर आयोजित करने की योजना बताई है। इस तरह के कार्यक्रमों में ज्यादातर रुचि महिलाओं ने दिखाई है।
आर्मस्ट्रांग के अनुसार, शिविर में आने वाली महिलाओं की उम्र लगभग 20 से 50 वर्ष के बीच है। इनमें कई ऐसी महिलाएं शामिल होती हैं, जो तलाक, बीमारी, रिश्तों के टूटने या अपने धार्मिक विश्वासों पर दोबारा विचार करने जैसे बदलावों से गुजर रही होती हैं। उनका कहना है कि लोग ऐसी जगह चाहते हैं, जहां वे अपमानित महसूस किए बिना अपनी भावनाएं सामने रख सकें और उन्हें मानसिक रूप से बीमार मानकर न देखा जाए।
शिविर में शामिल होने से पहले प्रतिभागियों की जांच भी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भावनाओं से निपटने के लिए उन्हें उचित सहायता उपलब्ध है। कार्यक्रम के दौरान फोटोग्राफी भी की जाती है। आर्मस्ट्रांग इसे महिलाओं के लिए खुद को सामान्य बनावटी अभिव्यक्तियों से अलग नजरिए से देखने का अवसर मानती हैं। छोटे समूहों में आयोजन का उद्देश्य प्रत्येक महिला को पर्याप्त समय और सहयोग देना है।
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