
उज्जैन। इस बार औसत से कम बारिश ने उज्जैन शहर की जलापूर्ति की चिंता बढ़ा दी है। जिले में सामान्य से करीब 33 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण शहर की प्यास बुझाने वाले गंभीर बांध में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया। बांध में अब करीब 700 एमसीएफटी पानी ही शेष है। सामान्य खपत के हिसाब से यह पानी चार महीने तक शहर में जलापूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है, लेकिन बांध के आसपास के गांवों में सिंचाई के लिए पानी लेने का सिलसिला शुरू होने से इसकी उपलब्धता तीन महीने में ही खत्म हो सकती है। ऐसे में शहर की जलापूर्ति बनाए रखने के लिए नर्मदा का पानी मंगवाने की जरूरत पड़ सकती है।
सिंचाई के लिए पानी लेने से बढ़ेगी परेशानी
गंभीर बांध के कैचमेंट क्षेत्र के आसपास के करीब दो दर्जन गांवों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों को फसलों की सिंचाई की चिंता सता रही है। ऐसे में किसानों ने गंभीर बांध से पानी लेना शुरू कर दिया है। इससे बांध में बचा पानी तेजी से कम होने की आशंका है। शहर में प्रतिदिन होने वाली जलापूर्ति के अलावा सिंचाई के लिए पानी निकलने से उपलब्ध जल भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। यही वजह है कि बांध में मौजूद 700 एमसीएफटी पानी को चार महीने तक चलने वाला मानकर निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता। यदि पानी की निकासी बढ़ती रही, तो शहर के लिए उपलब्ध जल भंडार अनुमान से पहले भी समाप्त हो सकता है। हालांकि, पानी कितने दिन चलेगा, यह आगामी दिनों में होने वाली खपत और बांध से पानी की निकासी पर निर्भर करेगा।
औसत 37 इंच के मुकाबले 24 इंच बारिश
इस साल बारिश के मौसम में उज्जैन शहर और जिले में करीब 24 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत लगभग 37 इंच माना जाता है। यानी करीब 13 इंच बारिश कम हुई। बारिश की इस कमी का असर सीधे गंभीर बांध के जलस्तर पर पड़ा। बांध में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से पूरे साल शहर की जरूरत पूरी करने के लिए जल भंडारण नहीं हो पाया।
अब नर्मदा के पानी पर निर्भरता
बारिश की संभावना नहीं रहने के बीच शहर की जलापूर्ति को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत बढ़ गई है। गंभीर बांध में पानी कम होने और सिंचाई के लिए भी पानी की मांग बने रहने पर नर्मदा का पानी मंगवाना पड़ सकता है। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती गंभीर बांध में उपलब्ध पानी का सावधानी से उपयोग करना है, ताकि शहरवासियों को नियमित जलापूर्ति में परेशानी न हो। आने वाले दिनों में बांध से पानी की निकासी और नर्मदा के पानी की उपलब्धता पर ही काफी हद तक निर्भर करेगा कि उज्जैन में पेयजल की व्यवस्था कितनी सुचारु बनी रहती है।
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