नई दिल्ली। मध्य प्रदेश भाजपा (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल (Hemant Khandelwal) और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Hemant Khandelwal) के बीच हाल ही में हुई मुलाकात ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। इस मुलाकात के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी नरोत्तम मिश्रा को एक बार फिर कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रही है या यह महज एक सामान्य मुलाकात थी। इसके अलावा, संगठन से जुड़े किसी अहम मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
नरोत्तम मिश्रा पिछले कुछ समय से लगातार अपनी राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा में हैं। कभी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात, कभी प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा तो कभी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट के जरिए वे अपनी राजनीतिक उपस्थिति का एहसास कराते रहे हैं। ऐसे में हेमंत खंडेलवाल के साथ उनकी हालिया मुलाकात को भी राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात के पीछे की वास्तविक वजह और किसी नई जिम्मेदारी को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ मध्य प्रदेश भवन, नई दिल्ली में आवासीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
विशेष रूप से सिंहस्थ और अन्य विकास योजनाओं से संबंधित लंबित मामलों को केंद्र सरकार के स्तर पर आगे बढ़ाने और उनके निराकरण में उनकी भूमिका अहम हो सकती है। उल्लेखनीय है कि सिंहस्थ मेले का नोडल विभाग नगरीय प्रशासन एवं आवास है। इस विभाग के आयुक्त होने के नाते सिंहस्थ की तैयारियों और उससे जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी संकेत भोंडवे के पास है। ऐसे में दिल्ली में अतिरिक्त प्रभार मिलने से उन्हें सिंहस्थ से जुड़े विभिन्न मामलों के समन्वय में मदद मिलने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष का पद पिछले करीब दो वर्षों से रिक्त है। वर्ष 1986 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह परिहार का कार्यकाल पूरा होने के बाद से इस पद पर अब तक किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो सकी है।
इस पद को भरने के लिए कई पूर्व आईएएस अधिकारी प्रयास कर चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी के नाम पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। अब सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार एक पूर्व अपर मुख्य सचिव के नाम पर विचार कर रही है।
ऐसे में प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस नियुक्ति को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। देखना होगा कि सरकार इस महत्वपूर्ण पद पर किस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपती है और पूर्व अपर मुख्य सचिव के नाम पर चल रहा विचार नियुक्ति तक पहुंच पाता है या नहीं।
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