
कांग्रेस युवाओं को ताड़ रही है… भाजपा खतरा भांप रही है… इसलिए संघ ने ताबड़तोड़ युवाओं को रिझाने की योजना बनाई… भाजपाइयों को थमाई… अब भाजपा के नेता देशभर में मुहिम चलाएंगे… कॉलेजों, स्कूलों, कोचिंग क्लासों में जाएंगे… घर-घर जाकर युवाओं को रिझाएंगे… अपना बनाने और उनका गुस्सा मिटाने के जतन आजमाएंगे… ताकि वोट बैंक सलामत रहे… कांग्रेस हो या कोई भी विरोधी युवाओं के विरोध का फायदा न उठा पाए… अपना वोट बैंक टूटने न पाए… भाजपाई पता नहीं कितना अपनी मुहिम में कामयाब हो पाएंगे और कांग्रेसी पता नहीं युवाओं के आक्रोश का कितना लाभ उठा पाएंगे… लेकिन यह तय है कि युवा बिफर रहा है… भड़क रहा है… आक्रोश और गुस्से की आग में जल रहा है… उसे हर तरफ नाकामी नजर आ रही है… वो पढ़ाई में दिन-रात खपा रहा है… अच्छे नंबरों से पास होकर भविष्य के सपने सजा रहा है… प्रतिस्पर्धाओं के संघर्ष में खुद को खपा रहा है… हजारों सीढ़ियां चढ़कर जब वो तय मुकाम तक जा रहा है तो रोजगार की मंजिलें दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही हैं… पिता का कर्ज, पढ़ाई का लोन, घर की जिम्मेदारियां, शादी के सपने सब कुछ बिखरते नजर आ रहे हैं… उसे निकम्मेपन के ताने दिए जा रहे हैं… खाली जेबों में उसे जीवन का खालीपन नजर आ रहा है… वो गहरे अवसाद में डूबते जा रहा है… और आप उसे बातों से रिझाना चाहते हैं… आप उसके जख्मों पर नमक डालने आ रहे हैं… उसके जलते सवाल उसे झुलसा रहे हैं… और आप उसके सवालों पर सवाल उठा रहे हैं… दरअसल, आप समझ ही नहीं पा रहे हैं… आपने पूरा देश ऑनलाइन कंपनियों के हवाले कर डाला… लोगों के पुश्तैनी कारोबार को मिटा डाला… किराना दुकान से लेकर सब्जी-भाजी, अनाज से लेकर घर का हर सामान अब ऑनलाइन आता है… अपने बच्चों को अपना रोजगार थमाने, उनके जीवन का आधार बनाने का मां-बाप का सपना आपने तोड़ दिया… दुकानें धड़ाधड़ बंद हो रही हैं… युवा तो युवा, बुजुर्ग भी बेरोजगार और कर्जदार हो रहे हैं… और बेचारे बच्चे उन्हीं कंपनियों के सामने नौकरी के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं… और आपने भी कौन-सा कम जुल्म नहीं किया… रेलवे हो या शिक्षक भर्ती की परीक्षा पुलिस हो या चपरासी पद के आवेदन… सौ भर्तियों के लिए दस-दस हजार आवेदन बुलाते हैं… हर आवेदन की कीमत लगाते हैं… बेरोजगार बच्चे आवेदन की कीमत चुकाकर सैकड़ों मील चलकर… हजारों रुपए फूंककर इंटरव्यू देने आते हैं… कहीं सड़कों पर कहीं बगीचों में तो कहीं फुटपाथों पर रात बिताते हैं… और आप या तो परीक्षा निरस्त कर डालते हैं या फिर उन सौ पदों पर मनमानी भर्ती कर डालते हैं… बेचारे युवा आवेदन की फीस… यात्रा का खर्च और दो निवालों की कीमत में और पिस जाते हैं… वैसे भी सरकारी नौकरियां अब बची कहां हैं… सरकारी उपक्रमों को भी आपने निजी के हवाले कर दिया… अब वो उपक्रम भी बड़े लोग चलाएंगे और छोटे लोगों को घुटनों पर लाएंगेे… आप गांधी के गुण गा रहे हैं… पटेल को अपना बता रहे हैं… नेहरू पर उंगली उठा रहे हैं, लेकिन हकीकत तो यह है कि आप उनके आजाद कराए देश को फिर से गुलाम बना रहे हैं… जिस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी देश में आई थी… उसी तरह विदेशी ऑनलाइन कंपनियां देश में घुस चुकी हैं… हमारे बच्चे उनके गुलाम बन जाएंगे… देश वो चलाएंगे और हम उनकी तिमारदारी करते नजर आएंगे… आप युवाओं को समझाने, मनाने, रिझाने से पहले इन सवालों के जवाब में अपना सिर खपाइए… इस मुसीबत को मिटाइए… फिर युवा तो क्या, देश आपका हो जाएगा… आपके हक की आवाज उठाएगा…
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