
नई दिल्ली: एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित (Air Chief Marshal Ashutosh Dixit) ने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के तौर पर कार्यभार संभाला. उनके सामने वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने, स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में तेजी लाने और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए क्षमताओं को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है. भारतीय वायुसेना में अधिकृत संख्या की तुलना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या काफी कम है.
विमानों की डिलीवरी में देरी और कई बड़ी खरीद योजनाओं के आगे नहीं बढ़ पाने के कारण दीक्षित का कार्यकाल वायुसेना के आधुनिकीकरण और ऑपरेशनल तैयारी के लिहाज से अहम रहेगा. दीक्षित ने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह ली है, जो 43 साल के करियर के बाद सेवानिवृत्त हुए. कार्यभार संभालने से पहले दीक्षित वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के पद पर थे. नेतृत्व परिवर्तन के तहत उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया.
फाइटर स्क्वाड्रन की कमी बड़ी चुनौती
नए वायुसेना प्रमुख के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लड़ाकू विमानों की घटती संख्या है. वायुसेना फिलहाल 42.5 की अधिकृत संख्या के मुकाबले करीब 29 फाइटर स्क्वाड्रन संचालित कर रही है. पुराने विमानों, खासकर मिग-21 बेड़े की सेवानिवृत्ति और उनकी जगह नए विमानों को शामिल करने में देरी से यह कमी और बढ़ी है. निवर्तमान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा था कि इस कमी को रोकने और क्षमता बढ़ाने के लिए वायुसेना को हर साल 36-40 लड़ाकू विमान शामिल करने की जरूरत है.
दीक्षित के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि प्रस्तावित खरीद और उत्पादन से जुड़े वादे वास्तविक डिलीवरी में बदलें और दो मोर्चों पर सुरक्षा चुनौती के बीच ऑपरेशनल तैयारी भी बनी रहे. स्वदेशी तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में देरी भी तत्काल चिंता का विषय है. वायुसेना ने फरवरी 2021 में 48,000 करोड़ रुपये के करार के तहत 83 विमानों का ऑर्डर दिया था. इनकी डिलीवरी 2024 से शुरू होनी थी. हालांकि, GE F404 इंजन, सॉफ्टवेयर वैलिडेशन और अन्य तकनीकी समस्याओं से कार्यक्रम प्रभावित हुआ है. 97 और विमानों के एक अन्य ऑर्डर की भी योजना है. ऐसे में दीक्षित को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और डिलीवरी की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए जोर देना होगा.
114 राफेल की खरीद भी प्राथमिकता
114 मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद भी दीक्षित की प्रमुख प्राथमिकताओं में होगी. इस कार्यक्रम के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने फरवरी 2026 में आवश्यकता की स्वीकृति (Acceptance of Necessity) दे दी थी. हालांकि, अभी करार पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं. कीमत पर बातचीत, करार से जुड़ी चर्चा और उत्पादन की योजना यह तय करेगी कि कार्यक्रम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है.
अनुभवी पायलट ने संभाली कमान
दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था. वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं. उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करणों, जगुआर, हॉक और तेजस जैसे विमानों पर 3,500 घंटे से अधिक उड़ान भरी है.
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