
नई दिल्ली: उत्तराखंड (Uttarakhand) के पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) और उनकी पत्नी जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत से जुड़ा संपत्ति और पैसों के लेन-देन का एक गंभीर मामला सामने आया है. देहरादून के रहने वाले हरिओम सहगल, जिन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए हैं, ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में उनसे एक भवन खरीदा गया था, लेकिन तय रकम का पूरा भुगतान नहीं किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के एसएसपी अजय सिंह डोभाल ने एसपी सिटी को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच सौंप दी है.
शिकायतकर्ता हरिओम सहगल के अनुसार, वर्ष 2021 में उन्होंने अपना भवन जसबीर कौर आनंद उर्फ सोनिया आनंद रावत को बेचा था. इस संपत्ति का सौदा 56 लाख रुपए में तय हुआ था, जबकि उस समय बाजार में इस भवन की कीमत दो करोड़ रुपए से अधिक और सरकारी मूल्यांकन के अनुसार भी 1.25 करोड़ रुपए से ज्यादा थी.
सहगल का आरोप है कि उन्हें तय रकम का भुगतान नहीं किया गया. उन्हें केवल दो किस्तों में कुल 12 लाख 80 हजार रुपए (2 लाख 80 हजार और 10 लाख रुपए) ही मिले, जबकि बाकी की रकम आज तक नहीं दी गई. उन्होंने रजिस्ट्री में इस्तेमाल किए गए चेक बाउंस होने, जबरन कब्जा करने, मारपीट करने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं. यह मामला नासिक की अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाइयों के दौर से गुजर चुका है.
SSP अजय सिंह का कड़ा रुख
दिव्यांग हरिओम सहगल द्वारा न्याय की गुहार लगाने के बाद देहरादून के एसएसपी अजय सिंह डोभाल ने मामले का संज्ञान लिया. एसएसपी ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया कि शिकायतकर्ता के दोनों हाथ नहीं हैं और वह लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं. SSP ने स्पष्ट किया, मामले की गंभीरता को देखते हुए हमने एसपी सिटी को विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी है. जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कानून की नजर में सभी लोग बराबर हैं और किसी की भी राजनीतिक पहचान जांच में बाधा नहीं बनेगी.”
कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद का पलटवार
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद रावत ने मीडिया के सामने आकर तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने इस पूरे प्रकरण को साल 2021 का पुराना मामला बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है. सोनिया आनंद का आरोप है कि बीजेपी नेताओं के इशारे पर उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने के लिए इस पुराने मामले को तूल दिया जा रहा है. उन्होंने शिकायतकर्ता की भाषा पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करती है, तो वह एसएसपी कार्यालय पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठेंगी.
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