
नई दिल्ली। उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली जिले (Chamoli district) में शुक्रवार को हुए हेलीकॉप्टर हादसे (Helicopter Accident) ने छह परिवारों की खुशियां छीन लीं। बदरीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें सवार पायलट और पांच यात्रियों की मौत हो गई। पांचों यात्री कर्नाटक के बेंगलुरु के रहने वाले थे, जबकि पायलट दिल्ली का निवासी था। कर्नाटक सरकार ने मृतकों के परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान प्रताप, अरुण सालुंके, शंकर गौड़ा, के. सुधीर और एच.एस. नटराज के रूप में हुई है। इनमें शंकर गौड़ा पेशे से वकील थे, जबकि अरुण सालुंके कर्नाटक पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। जोशीमठ के पास हुए इस हादसे ने उनके परिवारों के साथ ही दोस्तों और परिचितों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।
शंकर गौड़ा को याद कर भावुक हुए पड़ोसी
हादसे में जान गंवाने वाले शंकर गौड़ा के पड़ोसियों के मुताबिक, वे बेहद मिलनसार और मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे। पेशे से वकील शंकर काम के सिलसिले में अक्सर बेंगलुरु आते-जाते रहते थे। पड़ोसियों ने बताया कि वे हर किसी के सुख-दुख में शामिल होते थे। इलाके में किसी को परेशानी होती या मदद की जरूरत पड़ती, तो शंकर हमेशा आगे रहते थे।
उन्हें ईश्वर में गहरी आस्था थी। नवरात्रि के व्रत से लेकर गणपति पूजा और दिवाली तक, वे सभी त्योहार पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाते थे। उनके निधन से परिवार ही नहीं, पूरा मोहल्ला शोक में डूबा है।
2007 बैच के इंस्पेक्टर थे अरुण सालुंके
हादसे में जान गंवाने वाले अरुण सालुंके कर्नाटक के बेलगावी जिले के अथानी तालुका स्थित अराताला गांव के निवासी थे। वे कर्नाटक पुलिस के 2007 बैच के इंस्पेक्टर थे और बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच में तैनात थे।
अरुण ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में इंटेलिजेंस इंस्पेक्टर के रूप में की थी। मेहनत और सेवा के दम पर उन्होंने पुलिस विभाग में अपनी पहचान बनाई थी। लेकिन जोशीमठ के पास हुआ हेलीकॉप्टर हादसा उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।
ऐसे हुआ हादसा, उड़ान के 15 मिनट बाद टूटा संपर्क
जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक से आए श्रद्धालु गुरुवार सुबह बदरीनाथ धाम पहुंचे थे। सुबह करीब 10 बजे उनका हेलीकॉप्टर धाम में उतरा था। दर्शन के बाद वे भारत के अंतिम छोर पर स्थित खूबसूरत माना गांव भी गए।
माना गांव से लौटने के बाद यात्रियों ने हेलीपैड पर मौजूद गाइड से पूछा था कि क्या वे उसी दिन वापस लौट सकते हैं। हालांकि, उस समय मौसम उड़ान के अनुकूल नहीं था। निर्धारित नियमों के मुताबिक, यात्रियों को शुक्रवार सुबह ही वापस लौटना था।
शुक्रवार को भी खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण उड़ान में देरी हुई। आखिरकार दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर हेलीकॉप्टर ने बदरीनाथ धाम से उड़ान भरी। उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद ही हेलीकॉप्टर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल और बेस से संपर्क पूरी तरह टूट गया। इसके बाद हुए हादसे में पायलट समेत पांचों यात्रियों की मौत हो गई।
कर्नाटक सरकार ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने बयान जारी कर कहा कि वह उत्तराखंड प्रशासन के लगातार संपर्क में है। दोनों राज्यों के बीच समन्वय कर मृतकों के शव जल्द से जल्द कर्नाटक लाने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार ने शोकाकुल परिवारों को हरसंभव सहायता देने का भी आश्वासन दिया है।
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