
नई दिल्ली: यूरोप (Europe) के कई देशों में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बीच अब जर्मनी में भी हिंसा भड़क उठी है. शनिवार देर रात जर्मनी के वित्तीय केंद्र फ्रैंकफर्ट में उपद्रवियों ने दुकानों में लूटपाट और तोड़फोड़ की. बर्लिन, कोलोन और हैम्बर्ग समेत कई शहरों में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. पुलिस ने बताया कि इमरजेंसी सेवाओं के कर्मचारियों पर पटाखे, पत्थर और बोतलें फेंकने वाले प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. प्रदर्शनकारियों की हिंसा में 27 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि सैंकड़ों हिरासत में लिए गए. दिन में हजारों लोग ज्यादातर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल हुए थे. इन प्रदर्शनों का आयोजन कैंपेन ग्रुप ‘Gen Z रेगेल्ट’ ने किया था, जिसका अर्थ है ‘Gen Z ने चार्ज लिया’. प्रदर्शनकारी स्कूलों में फंडिंग की कमी, बढ़ते जीवन-यापन के खर्च, सरकारी खर्च में कटौती और अनिवार्य सैन्य सेवा के विरोध में सड़कों पर उतरे थे.
फ्रांस-पुर्तगाल में हिंसक प्रदर्शन
जर्मनी में यह अशांति फ्रांस में युवाओं के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद देखने को मिली. शनिवार को फ्रांस में भी 3.20 लाख से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया. उन्होंने बढ़ती महंगाई और सरकारी सेवाओं, खासकर शिक्षा क्षेत्र की खराब स्थिति के खिलाफ आवाज उठाई. प्रदर्शनों को देखते हुए पूरे फ्रांस में हजारों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. कुछ शहरों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े. फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान 770 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया. यह संख्या पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों में गिरफ्तार लोगों के मुकाबले करीब आधी थी.
यूरोप के कई देशों में जारी है हिंसा
इटली में भी विरोध प्रदर्शन हुए. रोम और ट्यूरिन में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. वहीं, पुर्तगाल में पुलिस ने एक नए टेंट कैंप को हटाने की कार्रवाई की. यह कैंप हजारों लोगों के किराये के बिल के विरोध में मार्च निकालने के बाद बनाया गया था. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे देश का आवास संकट और गंभीर हो सकता है. पिछले दस वर्षों में पुर्तगाल में घरों की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं. हाल के दिनों में फ्रांस, बेल्जियम, आयरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, सर्बिया और अल्बानिया समेत कई यूरोपीय देशों में युवा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं. अलग-अलग देशों में उनकी मांगें भले ही अलग हों, लेकिन ज्यादातर प्रदर्शनों में रहने का बढ़ता खर्च, किफायती आवास की कमी, शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी सेवाओं में कटौती जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं.
अब जर्मनी में भी भड़की हिंसा
रविवार को जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट ने ‘बिल्ड’ अखबार से कहा कि पुलिस ने रात में उस तरह की हिंसा को रोक दिया, जैसी हाल के हफ्तों में पेरिस में देखी गई थी। उन्होंने दंगाइयों और लुटेरों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग भी की. फ्रैंकफर्ट में रात के दौरान शहर की मुख्य शॉपिंग स्ट्रीट का बड़ा हिस्सा पुलिस ने बंद कर दिया था. पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहर में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है. फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख और बर्लिन में अधिकारियों ने 18 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की जानकारी दी. जर्मन मीडिया के मुताबिक, शनिवार को देश के अलग-अलग शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया. ‘Gen Z रेगेल्ट’ की प्रवक्ता लीना फ्रेडरिक ने कहा कि ये प्रदर्शन शांति और आजादी के लिए थे, न कि युद्ध और जबरदस्ती के लिए. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर समर्थन देना सबसे जरूरी है. संगठन अनिवार्य सैन्य सेवा के खिलाफ है और चाहता है कि जिम्मेदारियों का बंटवारा निष्पक्ष तरीके से हो.
फ्रैंकफर्ट में हिंसक झड़प
शनिवार रात फ्रैंकफर्ट पुलिस ने बताया कि शहर के बीचोंबीच हिंसक दंगे हो रहे थे. हालात संभालने के लिए विशेष पुलिस इकाइयों को तैनात किया गया. पुलिस के अनुसार, कई दुकानों की खिड़कियां तोड़ दी गईं और इमरजेंसी सेवाओं पर मोलोटोव कॉकटेल फेंके गए. अधिकारियों ने बताया कि एक गन शॉप की खिड़कियां भी तोड़ी गईं. इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया और उसके पास से दो हथियार जब्त किए गए. उपद्रवियों ने दूसरी दुकानों में भी तोड़फोड़ की और ट्रेनर समेत कई सामान चुरा लिए. हेस्से राज्य के गृह मंत्री रोमन पोसेक ने कहा कि करीब 100 ऐसे वामपंथी चरमपंथी प्रदर्शन में शामिल हो गए थे, जिनकी पहचान की गई है. फ्रैंकफर्ट हेस्से राज्य का सबसे बड़ा शहर है. पोसेक ने कहा कि प्रदर्शन जिस तरह हिंसा और लूटपाट में बदल गए, वह शर्मनाक है. उन्होंने फ्रांस में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि लूटपाट, घरों और पुलिस वाहनों में आगजनी तथा पुलिस अधिकारियों पर हमले जैसी घटनाओं को किसी भी हाल में उदाहरण नहीं माना जाना चाहिए. पुलिस के मुताबिक, रविवार रात तक शहर में हालात शांत हो गए थे.
जर्मनी के कई शहर हिंसा की चपेट में
जर्मनी के दूसरे शहरों में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आईं. कोलोन में पुलिस ने बताया कि मुख्य रेलवे स्टेशन के पास अधिकारियों पर हमला किया गया और उन पर बोतलें फेंकी गईं. बर्लिन पुलिस के मुताबिक, दिन में हुए बड़े प्रदर्शनों के बाद शाम को एक छोटे प्रदर्शन के दौरान 27 पुलिस अधिकारी घायल हो गए. इस दौरान 56 लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया. वहीं, हैम्बर्ग में काले कपड़े पहने लोगों ने पटाखे जलाए और बैरिकेड्स में आग लगा दी. पुलिस ने यहां 120 लोगों को गिरफ्तार किया. इस तरह, जर्मनी में शनिवार को हुए प्रदर्शन यूरोप के कई अन्य देशों में जारी बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच हिंसक हो गए.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved