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ECINet विवाद के बीच चुनाव आयोग में बड़ा फेरबदल, EC ने बदली अधिकारियों की जिम्मेदारी

November 06, 2026

नई दिल्ली। चुनाव आयोग (Election Commission- EC) ने अपने कामकाज में बदलाव करते हुए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नरों (Deputy Election Commissioners-DEC) और महानिदेशकों (Directors General- DG) के बीच जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा किया है। आयोग ने आईटी सिस्टम की जिम्मेदारी संभालने वाली वरिष्ठ अधिकारी सीमा खन्ना के कामकाज पर निगरानी की एक नई व्यवस्था लागू की है। इसके साथ ही वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग की कुछ जिम्मेदारियां दूसरे अधिकारी को सौंपी गई हैं। नए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर प्रकाश राजपुरोहित की नियुक्ति के बाद यह बदलाव किया गया है। इसके तहत अब वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर पवन कुमार शर्मा आईटी, आईसीटी और शिकायत निवारण से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

चुनाव आयोग ने 4 नवंबर को नया कार्य आवंटन आदेश जारी किया। इसके तहत आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना अब वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर पवन कुमार शर्मा की निगरानी में काम करेंगी। वहीं, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर प्रकाश राजपुरोहित को चुनावी योजना से जुड़े कामों में मनीष गर्ग की सहायता की जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब आयोग के भीतर कथित असहमति और अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है।


  • आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को अब किसे भेजनी होंगी फाइलें?
    चुनाव आयोग के नए आदेश के मुताबिक, आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को अपने विभाग से जुड़ी फाइलें वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर पवन कुमार शर्मा के माध्यम से भेजनी होंगी। उनके जिम्मे आईटी, आईसीटी, शिकायत और जन शिकायत निवारण प्रणाली (PGRS) से जुड़े विभाग हैं।

    सीमा खन्ना के विभाग का नाम उस विवाद के केंद्र में रहा है, जिसमें चुनाव आयोग के डिजिटल वोटर लिस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के केंद्रीकरण और सॉफ्टवेयर में लगाई गई पाबंदियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि राज्य के अधिकारियों की वोटर लिस्ट तक पहुंच सीमित कर दी गई थी।

    नए आदेश के तहत पवन कुमार शर्मा को सिर्फ आईटी और आईसीटी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों, चुनाव खर्च नीति, पर्यवेक्षक विभाग और समन्वय की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसके अलावा उनके पास नॉर्थ ईस्ट-II, ईस्ट-II और साउथ-II जोन का प्रभार भी रहेगा।

    मनीष गर्ग के पास बनी रहेगी चुनावी योजना और EVM की जिम्मेदारी
    नए कार्य आवंटन में मनीष गर्ग के पास चुनावी योजना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और चुनावी डेटाबेस प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी बरकरार रखी गई है। इसके अलावा बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ वाले ईस्ट-I तथा उत्तर प्रदेश वाले नॉर्थ-III जोन की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी।

    डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर प्रकाश राजपुरोहित चुनावी योजना से जुड़े मामलों में मनीष गर्ग की सहायता करेंगे। राजपुरोहित के पास परिसीमन का प्रभार भी रहेगा। वहीं, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर भानु प्रकाश येतुरु प्रशासन, स्थापना, मतदाता सूची और आरटीआई से जुड़े विभागों का कामकाज देखेंगे। प्रकाश राजपुरोहित को चुनावी योजना से संबंधित फाइलें मनीष गर्ग के माध्यम से भेजनी होंगी।

    चुनाव आयोग ने दी सफाई
    निर्वाचन आयोग द्वारा अपने कार्य आवंटन आदेश में संशोधन किए जाने के एक दिन बाद आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसके सूचना प्रौद्योगिकी महानिदेशक (डीजी-आईटी) को रिपोर्ट करने वाले पर्यवेक्षण अधिकारी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आयोग की ओर से बुधवार को जारी नए कार्य आवंटन आदेश के अनुसार, डीजी (आईटी) सीमा खन्ना अब वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग के बजाय नवनियुक्त उप निर्वाचन आयुक्त प्रकाश राज पुरोहित की निगरानी में काम करेंगी।

    इससे पहले, 28 जुलाई को गर्ग द्वारा जारी एक आदेश के बाद विवाद खड़ा हो गया था। इस आदेश में खन्ना को सीधे आयोग, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त व दोनों निर्वाचन आयुक्त शामिल हैं, को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। आयोग के अधिकारी से पूछा गया था कि क्या सीमा खन्ना ने 28 जुलाई से चार नवंबर के बीच किसी उप निर्वाचन आयुक्त के माध्यम से रिपोर्ट करने के बजाय सीधे निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट किया था।

    गर्ग ने 28 जुलाई को यह आदेश उस समय जारी किया था, जब एक अन्य उप निर्वाचन आयुक्त संजय कुमार, जिन्हें खन्ना रिपोर्ट करती थीं, का तबादला दिल्ली सरकार में कर दिया गया था। निर्वाचन आयुक्त एस एस संधू और विवेक जोशी द्वारा इस आदेश पर आपत्ति जताए जाने के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था।

    अधिकारी ने कहा, ”आदेश लागू नहीं किया गया था, इसलिए संजय कुमार के निर्वाचन आयोग से जाने के बाद खन्ना के कार्य के निगरानी गर्ग कर रहे थे। अब वह उप निर्वाचन आयुक्त राज पुरोहित को रिपोर्ट करेंगी, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही कार्यभार संभाला है।” गर्ग, संजय कुमार के ‘संपर्क अधिकारी’ थे। इसका अर्थ है कि निर्वाचन आयोग से कुमार के जाने के बाद उन्हें सौंपे गए कार्य गर्ग को हस्तांतरित हो गए थे।

    जुलाई के आदेश से शुरू हुआ था विवाद
    चुनाव आयोग में अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे को लेकर विवाद की शुरुआत 28 जुलाई के एक आदेश से हुई थी। उस समय डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर भानु प्रकाश येतुरु छुट्टी पर थे और मनीष गर्ग को प्रशासन विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने आरोप लगाया था कि मनीष गर्ग ने 28 जुलाई को वरिष्ठ और उनके समकक्ष अधिकारियों के कामकाज के आवंटन से जुड़ा आदेश जारी कर दिया। दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि इस फैसले से पहले उनसे कोई चर्चा नहीं की गई थी।

    दोनों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को लगभग एक जैसे पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इन पत्रों में मुख्य रूप से फाइलों के आवागमन में बदलाव और फैसले लेने की प्रक्रिया में परामर्श नहीं किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। विवेक जोशी ने यह भी आरोप लगाया था कि प्रशासन विभाग से उन्होंने जो फाइल मांगी थी, वह उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।

    ECINet और वोटर लिस्ट को लेकर भी उठे थे सवाल
    एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सीमा खन्ना के नेतृत्व में लागू किए गए नए आईटी प्रोटोकॉल और सिस्टम के कारण मतदाता सूची का डेटाबेस उन अधिकारियों की पहुंच से भी बाहर हो गया था, जिनकी जिम्मेदारी मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने की है। इनमें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) भी शामिल हैं।

    रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से कई मुद्दों पर असहमत होने की बात भी कही गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि उसके सभी फैसले नियमों के मुताबिक सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिए गए हैं।

    विवाद के बीच सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी
    चुनाव आयोग में कथित मतभेदों और वोटर लिस्ट से जुड़े विवाद ने राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ाई है। पिछले दो महीनों में कार्यकर्ताओं, कॉकरोच जनता पार्टी और संसद में विपक्षी दलों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों के दौरान राजधानी में मेट्रो सेवाओं पर रोक, इंटरनेट बंदी और निषेधाज्ञा जैसे कदम उठाए गए। करीब 40 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर भी विवाद हुआ।

    विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और विवादित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग कर रहा है। वहीं, भाजपा का आरोप है कि विपक्ष अपने राजनीतिक और चुनावी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

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