
नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर (Jammu And Kashmir) की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (National Conference) में कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुआ आंतरिक विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के नाराज विधायकों और शीर्ष नेतृत्व के बीच शुक्रवार, 6 नवंबर को श्रीनगर (Srinagar) में महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। सुबह 10:30 बजे होने वाली इस मुलाकात में पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) असंतुष्ट विधायकों से सीधे बातचीत करेंगे। बैठक में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद सुलझा पाते हैं या विधायकों की शर्तें पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनती हैं।
इस बैठक से पहले असंतुष्ट विधायकों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए गुरुवार देर शाम श्रीनगर के सनतनगर में गोपनीय बैठक की। यह बैठक पांपोर के विधायक और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी के आवास पर आयोजित हुई। पिछले सात दिनों में नाराज गुट की यह चौथी बैठक थी। करीब पांच घंटे तक चली इस चर्चा में शुक्रवार को नेतृत्व के सामने रखे जाने वाले साझा एजेंडे और मांगों का मसौदा तैयार किया गया।
बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस के लगभग 15 से 16 प्रमुख विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल हुए। इनमें मुबारक गुल, नजीर अहमद खान गुरेजी, एजाज जान, फारूक अहमद शाह, कैसर जमशीद लोन, अब्दुल मजीद लारमी, बशीर अहमद वीरी, खुर्शीद अहमद, अर्जुन सिंह राजू और जावेद अहमद मिर्चल जैसे नेता शामिल थे। निर्दलीय विधायक मुजफ्फर इकबाल खान के अलावा सैफुद्दीन भट, चौधरी मोहम्मद अकरम और जावेद चौधरी भी बैठक में मौजूद रहे।
असंतुष्ट विधायकों का आरोप है कि मुख्यमंत्री के सलाहकार की कार्यप्रणाली के कारण पार्टी संगठन और निर्वाचित विधायकों के बीच दूरी बढ़ रही है। उनका मानना है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के लिए नेतृत्व को कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने होंगे।
विधायकों की प्रमुख मांग पूरी कैबिनेट का पुनर्गठन करना है। उनका कहना है कि जिन मंत्रियों ने दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उनके कामकाज का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। जिनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है, उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जाए। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग का प्रभार संभाल रहे सुरिंदर चौधरी से यह जिम्मेदारी वापस लेने और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाने की मांग भी शामिल है।
इन मांगों के समर्थन में विधायक 3 जून को दाछिगाम में हुई बैठक का हवाला दे रहे हैं। उस बैठक में 20 से अधिक विधायकों ने सुरिंदर चौधरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। असंतुष्ट गुट का मानना है कि उस समय उठाई गई आपत्तियों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
पार्टी के भीतर नाराजगी का खुला प्रदर्शन 30 अक्तूबर को सामने आया था। उस समय कुछ विधायकों ने वरिष्ठता और क्षेत्रीय संतुलन की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अचानक बैठक की थी। इसके बाद मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता गया। नाराज विधायकों की संख्या 25 से अधिक बताई जा रही है। ये विधायक सभी मौजूदा मंत्रियों को बदलने सहित 10 सूत्री मांगों पर एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं।
शुक्रवार की बैठक में नाराज विधायकों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला उनकी मांगों पर जवाब देंगे। पार्टी के भीतर इस बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके नतीजे से संगठन में आगे की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा तय हो सकती है।
वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा है कि विधायकों की नाराजगी दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक पार्टी में विद्रोह जैसी स्थिति नहीं है और सभी विधायकों को मनाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को शुक्रवार की बैठक के लिए रणनीति बनाई गई है। सभी विधायक साझा एजेंडे के तहत अपनी बात रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में भ्रष्टाचार से जुड़े लोगों को बाहर करने की जरूरत है और बातचीत सकारात्मक रहने की उम्मीद है।
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