
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम (Ratlam) में धनतेरस (Dhanteras) और दीपावली को लेकर विशेष धार्मिक तैयारियां की गई हैं। शहर के माणकचौक क्षेत्र में स्थित प्राचीन श्री महालक्ष्मी मंदिर (Shri Mahalakshmi Temple) में मां लक्ष्मी का दरबार करोड़ों रुपये के नोटों और सोने-चांदी (Gold And Silver) के आभूषणों से सजाया जा रहा है। मंदिर की यह परंपरा हर साल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है। इस बार भी नोटों की गड्डियों से फूल, गुलदस्ते, गमले और वंदनवार तैयार किए जा रहे हैं। धनतेरस यानी 6 नवंबर 2026 को सुबह पूजा के बाद भक्त इस विशेष शृंगार के दर्शन कर सकेंगे।
मंदिर में सजावट के लिए श्रद्धालुओं की ओर से नकदी और आभूषण जमा कराने का सिलसिला शरद पूर्णिमा से शुरू हो गया था। अब तक करीब दो से तीन हजार भक्त अपनी ओर से नोटों की गड्डियां जमा करा चुके हैं। इसमें एक रुपये से लेकर 500 रुपये तक के नोट शामिल हैं। 5 नवंबर की रात तक श्रद्धालुओं से सजावट के लिए राशि स्वीकार की गई। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में लोग नोटों की गड्डियां लेकर मंदिर पहुंचे।
इस धार्मिक परंपरा में केवल रतलाम और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालु ही शामिल नहीं होते, बल्कि देश के कई राज्यों से लोग अपनी नकदी और जेवर लेकर पहुंचते हैं। इस बार गुजरात, कर्नाटक, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के भक्तों ने भी योगदान दिया है। कुछ श्रद्धालुओं ने विदेशी मुद्रा भी मंदिर में जमा कराई है।
मंदिर के पुजारी अश्विन पुजारी के अनुसार, इस वर्ष भी मां महालक्ष्मी का दरबार नोटों और सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया जा रहा है। पहले आम श्रद्धालुओं से भी सजावट के लिए जेवर स्वीकार किए जाते थे, लेकिन अब आभूषणों की व्यवस्था कुछ चुनिंदा दुकानदारों के माध्यम से की जाती है। नोटों से तैयार की जा रही सजावट का काम देर रात तक चलता रहा।
धनतेरस पर 6 नवंबर की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मां महालक्ष्मी की विशेष पूजा होगी। इसके बाद मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए जाएंगे। मंदिर का यह विशेष शृंगार लगातार पांच दिनों तक रहेगा। भाईदूज के बाद श्रद्धालुओं को उनकी ओर से जमा कराए गए रुपये और आभूषण वापस करने की प्रक्रिया शुरू होगी। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रत्येक जमा राशि और जेवर का पूरा हिसाब रखा जाता है, ताकि संबंधित व्यक्ति को उसकी सामग्री लौटाई जा सके।
इस व्यवस्था को लेकर मंदिर में ऑनलाइन पंजीयन और टोकन प्रणाली भी लागू की गई है। श्रद्धालुओं को ऑनलाइन फॉर्म में अपना नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल, शहर, राज्य, पिन कोड और पता दर्ज करना होता है। पंजीयन के बाद प्राप्त नंबर मंदिर में दिखाने पर ऑपरेटर संबंधित जानकारी दर्ज कर जमा राशि स्वीकार करता है। इसके बाद मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। ओटीपी सत्यापित होने पर टोकन तैयार होता है। इसकी दो प्रतियां बनाई जाती हैं, जिनमें से एक श्रद्धालु और दूसरी मंदिर समिति के पास रहती है। भाईदूज के बाद रुपये वापस लेने के लिए टोकन प्रस्तुत करना जरूरी होगा।
करोड़ों रुपये की नकदी और कीमती आभूषणों को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां 24 घंटे निगरानी के लिए 24 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। चार सुरक्षा गार्ड आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में तैनात हैं। पुलिस अधिकारी भी समय-समय पर व्यवस्था का निरीक्षण कर रहे हैं। मंदिर के पास ही माणकचौक पुलिस थाना स्थित है।
धनतेरस के अवसर पर मंदिर में कुबेर पोटली का वितरण भी किया जाएगा। बुधवार को विधि-विधान से इसका पूजन किया गया। 6 नवंबर को सुबह पांच बजे आरती के बाद पोटली बांटने का सिलसिला शुरू होगा, जो भाईदूज तक चलेगा। लाल कपड़े में दी जाने वाली इस पोटली में कमलगट्टा, कौड़ी, चावल, सुपारी, पिस्ता और गोमती चक्र रखे जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन वस्तुओं को मां लक्ष्मी को अर्पित करने से व्यापार में उन्नति और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई लोग वर्षों से यहां आ रहे हैं। शिक्षिका प्रियंका जोशी ने बताया कि वह 17 वर्षों से मंदिर में दर्शन कर रही हैं और इस बार पहली बार उन्होंने सजावट के लिए रुपये जमा कराए हैं। व्यवसायी लोकेश मित्तल भी अपनी नोटों की गड्डी जमा कराने पहुंचे, ताकि दीपावली पर उनके रुपयों की पूजा हो सके। वहीं आदर्श द्विवेदी ने पहली बार इस परंपरा में हिस्सा लिया और ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को सुविधाजनक बताया।
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