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IIT पटना के रजिस्ट्रार की कथित जातिगत टिप्पणी पर FIR, सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद अब पहुंचा थाने..

November 07, 2026

नई दिल्ली । बिहार (Bihar) की राजधानी पटना (Patna) स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना (Indian Institute Of Technology Patna) के रजिस्ट्रार अवलेन्द्र कुमार ठाकुर (Avalendra Kumar Thakur) के खिलाफ दलित समाज पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि रजिस्ट्रार की टिप्पणी से दलित समुदाय के सम्मान, सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों को ठेस पहुंची है। मामले में पटना के एससी-एसटी थाने (SC-ST Police Station) में 5 नवंबर को FIR दर्ज की गई।

यह मामला पूर्व कांग्रेसी नेता आदित्य पासवान की ओर से दी गई लिखित शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अवलेन्द्र कुमार ठाकुर ने 19 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी साझा की थी। इसमें कथित तौर पर लिखा गया था, ‘काबिल मत बनो, दलित बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी’। इस कथन को लेकर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताते हुए इसे दलित समाज की प्रतिभा, मेहनत और संघर्ष का अपमान बताया है।

आदित्य पासवान का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी किसी एक व्यक्ति की भावनाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे समाज के बड़े वर्ग के सम्मान पर असर पड़ता है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि वह स्वयं दलित समुदाय से आते हैं और कथित पोस्ट से उनकी व्यक्तिगत भावनाएं आहत हुई हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की भाषा देश के करोड़ों दलित नागरिकों के आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान को भी प्रभावित कर सकती है।

शिकायतकर्ता ने आरक्षण के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक लाभ या किसी वर्ग को दिया गया उपहार नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारतीय संविधान में आरक्षण का प्रावधान ऐतिहासिक सामाजिक असमानता, भेदभाव और वंचित समुदायों को समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत किसी अन्य जाति या समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य संविधान में दिए गए समानता और सम्मान के मूल्यों की रक्षा करना है।

आदित्य पासवान ने यह भी सवाल उठाया कि किसी प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी की ओर से इस तरह की कथित टिप्पणी सामने आना गंभीर विषय है। उनका मानना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की अभिव्यक्ति का व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकता है। ऐसी टिप्पणियों से अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास और जातीय तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है।

इस मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने 5 नवंबर को पटना के एससी-एसटी थाने में प्राथमिकी दर्ज की। शिकायत में दलित समाज की भावनाओं को आहत करने, संविधान की भावना का अपमान करने और जातीय वैमनस्य फैलाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और मामले में इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान IIT पटना के रजिस्ट्रार अवलेन्द्र कुमार ठाकुर से पूछताछ किए जाने की संभावना है। पुलिस कथित सोशल मीडिया पोस्ट और शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी।


  • फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच महत्वपूर्ण है। कथित पोस्ट की परिस्थितियों, उसकी सामग्री और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी। अब यह देखना होगा कि जांच में पुलिस को क्या तथ्य मिलते हैं और रजिस्ट्रार का पक्ष सामने आने के बाद मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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