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सोलर टेक्नोलॉजी में बड़ा धमाका बिना पारंपरिक बैटरी के सालों तक स्टोर होगी सूरज की ऊर्जा जानिए कैसे काम करती है सन बैटरी

June 27, 2026

नई दिल्ली। सौर ऊर्जा (solar energy)के क्षेत्र में वैज्ञानिकों(technology) ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है जो भविष्य में बिजली (future landscape)और ऊर्जा भंडारण(electricity and energy storage) की तस्वीर बदल सकती है। अब सूरज की रोशनी को सीधे एक विशेष मॉलिक्यूल में कैद कर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर उसे गर्मी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह तकनीक पारंपरिक बैटरियों पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

यह नई तकनीक अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सांता बारबरा के शोधकर्ताओं ने विकसित की है। इसे मॉलिक्यूलर सोलर थर्मल तकनीक कहा जाता है। इसमें वैज्ञानिकों ने ऐसा विशेष ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल तैयार किया है जो सूर्य की रोशनी से मिलने वाली ऊर्जा को अपने रासायनिक बंधनों में सुरक्षित कर लेता है। खास बात यह है कि यह ऊर्जा लंबे समय तक बिना किसी बड़े नुकसान के सुरक्षित रह सकती है।

इस तकनीक का सिद्धांत काफी रोचक है। वैज्ञानिकों ने इस मॉलिक्यूल की संरचना इंसानी डीएनए से प्रेरित होकर तैयार की है। जब इस पर सूर्य की पराबैंगनी किरणें पड़ती हैं तो इसका आकार बदल जाता है और यह स्प्रिंग की तरह ऊर्जा को अपने भीतर लॉक कर लेता है। यह बदली हुई अवस्था लंबे समय तक बनी रह सकती है। बाद में जब इसे हल्की गर्मी या विशेष रासायनिक प्रक्रिया के संपर्क में लाया जाता है तो यह अपने मूल स्वरूप में लौट आता है और अपने भीतर जमा ऊर्जा को गर्मी के रूप में बाहर छोड़ देता है।

ऊर्जा भंडारण क्षमता के मामले में भी यह तकनीक बेहद प्रभावशाली मानी जा रही है। जहां एक किलोग्राम लीथियम बैटरी लगभग 0.9 मेगाजूल ऊर्जा स्टोर कर सकती है वहीं समान मात्रा में यह नया मॉलिक्यूल करीब 1.6 मेगाजूल ऊर्जा सुरक्षित रखने में सक्षम है। यानी ऊर्जा घनत्व के मामले में यह पारंपरिक लीथियम बैटरियों से काफी बेहतर प्रदर्शन करता है।


  • विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है तो सोलर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती का समाधान मिल सकता है। अभी सौर ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से दिन के समय ही प्रभावी रहता है जबकि रात या बादलों के मौसम में ऊर्जा संग्रह के लिए महंगी बैटरियों की जरूरत पड़ती है। नई तकनीक इस समस्या को काफी हद तक दूर कर सकती है।

    भविष्य में इस मॉलिक्यूल का उपयोग तरल पदार्थ के रूप में सोलर कलेक्टर सिस्टम में किया जा सकता है। दिनभर यह सूर्य की ऊर्जा को सोखेगा और बाद में टैंकों में सुरक्षित रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर यही ऊर्जा घरों को गर्म रखने पानी गर्म करने या ऑफ ग्रिड हीटिंग सिस्टम में इस्तेमाल की जा सकेगी। कैंपिंग और दूरदराज के इलाकों में भी इसका उपयोग काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

    इस तकनीक की एक और बड़ी खासियत इसका पर्यावरण अनुकूल होना है। शोधकर्ताओं के अनुसार इस मटेरियल को कई बार रिचार्ज और रीसायकल किया जा सकता है जिससे इसकी उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहेगी। यदि आगे के परीक्षण और व्यावसायिक विकास सफल रहे तो आने वाले वर्षों में यह तकनीक स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकती है।

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