
उज्जैन। वरिष्ठ कवि जीवन प्रकाश आर्य के काव्य संग्रह भाव शब्दिका का सोमवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में लोकार्पण किया गया। प्रेमचंद सृजन पीठ की ओर से आयोजित राष्ट्रीय समीक्षा संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आर्य की कविताओं में जीवन के उल्लास के साथ मानवीय संघर्ष, पीड़ा, सामाजिक विसंगतियों और आम आदमी की व्यथा का मार्मिक चित्रण है।
मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कहा कि रचनाकार असंख्य लोगों की पीड़ा को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्ति देता है। जीवन प्रकाश आर्य ने अपनी रचनाओं में यह काम बखूबी किया है। उन्होंने कवि की छंदबद्ध रचनाओं की सराहना की। अध्यक्षता कर रहे पूर्व कुलपति प्रो. बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि आर्य की कविताएं हृदय को छूती हैं। वे नए बिंबों और शब्दों से अपनी अलग काव्य भाषा रचते हैं। मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि ‘भाव शब्दिकाÓ कवि के पांच दशकों के संघर्ष, अनुभव और संवेदनाओं का निचोड़ है। इसमें सामाजिक पतन, राजनीतिक अव्यवस्था और आम आदमी की पीड़ा को स्वर मिला है। आर्य समाज से जुड़ाव के चलते उनकी कविताओं में वेद, उपनिषद और पौराणिक संदर्भ भी दिखाई देते हैं। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने कविताओं में मानवीय संवेदना और भारतीय काव्य परंपरा की झलक बताई। पूर्व राजभाषा अधिकारी हीरालाल कर्नावट (अहमदाबाद), आलोचक बी.एल. आच्छा (चेन्नई) और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जया मिश्रा ने भी कृति पर विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। स्वागत भाषण प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी ने दिया और बीज वक्तव्य अमित माथुर ने रखा। पं. शैलेंद्र भट्ट, बालकृष्ण गौतम, दिनेश परिहार, ललित नागर, प्रदीप चतुर्वेदी और हंसा चतुर्वेदी ने कविताओं की सांगीतिक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर डॉ. पिलकेंद्र अरोरा, डॉ. हरीशकुमार सिंह, शशांक दुबे, राजेंद्र व्यास, अशोक भाटी, डॉ. क्षमा सिसोदिया, शांतिलाल जैन, संदीप सृजन, डॉ. राजेश रावल, डॉ. विक्रम विवेक, डॉ. स्वामिनाथ पांडे, डॉ. संदीप नाडकर्णी, डॉ. माया बदेका, सीमा देवेंद्र, संगीता तल्लेरा, श्वेतिमा निगम और डॉ. गीतांजलि मिश्रा सहित साहित्यकार मौजूद थे। अतिथि स्वागत जीवन प्रकाश आर्य, मुकेश जोशी, सीमा देवेंद्र, नियति माथुर, कुशाग्र माथुर और वेदांश कुलश्रेष्ठ ने किया। संचालन दुर्गाशंकर सूर्यवंशी और रश्मि भुराडिय़ा ने किया। आभार किशोर चंदन ने माना।
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