
उज्जैन। इस बार दिवाली पर महंगाई की मार के साथ-साथ आतिशबाजी करना भी महंगा हो गया है। थोक बाजार में पटाखे 25 से 35 प्रतिशत महंगे मिल रहे हैं। लोकल पटाखों से लेकर ब्रांडेड पटाखों के निर्माताओं ने भाव में इतनी तेजी ला दी है कि पटाखा मार्केट भी इस बार कमजोर पड़ा हुआ है। हालांकि बाहरी और थोक खरीदारी जारी है। अब इस सप्ताह से लोकल ग्राहकी शुरू होने की संभावना है।
उज्जैन के थोक पटाखा मार्केट लगा हुआ है। दिवाली के एक सप्ताह पहले तक पटाखा मार्केट में पैर रखने तक की जगह नहीं रहती थी, लेकिन इस बार पटाखा व्यापारी निराश हैं।पटाखे महंगे हो गए हैं, वहीं अभी लोकल ग्राहकी शुरू नहीं हो पाई है। व्यापारियों को शंका है कि महंगाई को देखते हुए इस बार पटाखों की बिक्री पर असर पड़ सकता है। इस बार पटाखों के दामों में 25 से 35 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। पटाखा महंगा बिकने की वजह दक्षिण भारत में लगातार बारिश होना है। शिवाकाशी और उसके आसपास के जिले में जहां पटाखों का निर्माण होता है, वहां पटाखे समय पर नहीं बन पाए और सूख नहीं पाए, जिसके कारण बाजार में पटाखों की कई रेंज आ नहीं पाई हैं। वहीं युद्ध के कारण भी जो कच्चा माल आयात किया जाता था, उसमें भी कमी आई है। ये ही दो बड़े कारण हैं, जिनके कारण इस बार पटाखों के दाम में बढ़ोतरी हुई है। अब माना जा रहा है कि दिवाली के इस पहले सप्ताह में ग्राहकी उठ सकती है। बाहरी खरीदारी पूरी हो चुकी है और अब जो दुकानें लोकल लेवल पर लगेंगी, उनकी खरीदारी शुरू होना है। आम ग्राहक आखिर के 3-4 दिनों में ही खरीदारी करते हैं, लेकिन इस बार महंगाई ज्यादा होने की वजह से पटाखों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।
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