नई दिल्ली। दुनिया के ज्यादातर शहरों में गाड़ियों के हॉर्न, ट्रैफिक के शोर (Horns, traffic noise) और भीड़भाड़ के बीच जिंदगी भागती नजर आती है। लेकिन यूरोप के माल्टा (Malta, in Europe) में एक ऐसा ऐतिहासिक शहर भी है, जहां पहुंचते ही शोरगुल (Commotion) से दूर एक अलग ही दुनिया का एहसास होता है। संकरी पत्थर की गलियां, सुनहरी दीवारों वाली प्राचीन इमारतें और चारों ओर पसरा सन्नाटा इस शहर को खास बनाते हैं। यही वजह है कि म्डीना को दुनिया भर में ‘द साइलेंट सिटी’ यानी खामोश शहर के नाम से जाना जाता है।
कल्पना कीजिए कि आप किसी प्राचीन शहर की घुमावदार गलियों में टहल रहे हैं। आसपास सदियों पुरानी इमारतें हैं, लेकिन न गाड़ियों के हॉर्न सुनाई देते हैं और न ही ट्रैफिक का शोर। यहां की शांत फिजा और ऐतिहासिक खूबसूरती पर्यटकों को ऐसा अनुभव देती है, मानो वे समय में पीछे लौट आए हों। म्डीना की पहचान केवल इसकी खामोशी नहीं, बल्कि इसका समृद्ध इतिहास और अनूठी वास्तुकला भी है।
करीब 4,000 साल पुराना है शहर का इतिहास
माल्टा का म्डीना देश की प्राचीन राजधानी रह चुका है। इसका इतिहास लगभग 4,000 साल पुराना माना जाता है। ईसा पूर्व करीब 800 में फोनिशियन लोगों ने यहां बसावट की थी। बाद में रोमन शासन के दौरान भी यह एक महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा। अरब शासन के समय इसे ‘म्डीना’ नाम मिला, जिसका अर्थ शहर या आबाद बस्ती से जुड़ा है।
1530 के दशक में जब ऑर्डर ऑफ सेंट जॉन के शूरवीरों ने माल्टा पर नियंत्रण स्थापित किया, तो प्रशासनिक और रणनीतिक कारणों से राजधानी को समुद्र के किनारे बसे वलेटा में स्थानांतरित कर दिया गया। राजधानी बदलने के बाद म्डीना का राजनीतिक और व्यापारिक महत्व कम होने लगा। व्यापारी, अधिकारी और संपन्न परिवार नए केंद्र की ओर जाने लगे। धीरे-धीरे शहर की चहल-पहल घट गई और इसकी पहचान शांति से जुड़ती चली गई।
म्डीना की खामोशी के पीछे इसकी कम आबादी, ऐतिहासिक संरचना और वाहनों की सीमित आवाजाही की अहम भूमिका है। यहां पुराने शहर के भीतर आम पर्यटक अपनी गाड़ियां लेकर नहीं जा सकते। कुछ अधिकृत स्थानीय वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को प्रवेश की अनुमति होती है। इससे संकरी गलियों में यातायात और शोर सीमित रहता है।
शहर की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए यहां के वातावरण और विरासत का विशेष ध्यान रखा जाता है। स्थानीय जीवन में शांति का महत्व इतना अधिक है कि यहां की सड़कों पर चलते हुए पर्यटक भी अक्सर धीमी आवाज में बातचीत करते नजर आते हैं। हालांकि, शहर के सभी हिस्सों में हर तरह के शोर पर पूर्ण प्रतिबंध होने का दावा करना सही नहीं होगा।
संकरी गलियां और सुनहरी इमारतें हैं खास पहचान
म्डीना की वास्तुकला इसकी खूबसूरती के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक महत्व को भी दर्शाती है। यहां की संकरी और घुमावदार गलियां मध्यकालीन शहरी संरचना की याद दिलाती हैं। चूना पत्थर से बनी इमारतें, ऊंची दीवारें और प्राचीन दरवाजे शहर को विशिष्ट रूप देते हैं।
यहां के महल नॉर्मन और बारोक वास्तुकला की झलक दिखाते हैं। सेंट पॉल्स कैथेड्रल शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। धूप पड़ने पर चूना पत्थर की दीवारें सुनहरी दिखाई देती हैं, जबकि शाम होते ही हल्की पीली रोशनी में पुरानी गलियां और भी आकर्षक नजर आने लगती हैं।
‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ की शूटिंग से भी मिली पहचान
म्डीना की ऐतिहासिक खूबसूरती ने फिल्म निर्माताओं को भी आकर्षित किया है। लोकप्रिय फैंटेसी सीरीज ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ के पहले सीजन में काल्पनिक शहर ‘किंग्स लैंडिंग’ के कुछ शुरुआती दृश्यों की शूटिंग माल्टा में की गई थी। म्डीना का ऐतिहासिक प्रवेश द्वार और इसकी प्राचीन गलियां इस सीरीज के फिल्मांकन से जुड़ी प्रमुख जगहों में शामिल हैं।
पुरानी इमारतों और मध्यकालीन माहौल के कारण यह शहर पर्दे पर किसी काल्पनिक साम्राज्य जैसा दिखाई देता है। यही वजह है कि इतिहास, वास्तुकला और सिनेमा में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए भी म्डीना खास आकर्षण रखता है।
रात होते ही बदल जाती है शहर की रंगत
दिन के समय म्डीना में पर्यटक इसकी ऐतिहासिक इमारतों, कैथेड्रल और प्राचीन गलियों को देखने पहुंचते हैं। लेकिन शाम ढलने और पर्यटकों की भीड़ कम होने के बाद शहर का वातावरण और शांत हो जाता है। मंद पीली रोशनी में नहाई पत्थर की गलियां और पुरानी इमारतें इसे किसी रहस्यमयी दुनिया जैसा रूप देती हैं।
म्डीना की खासियत यह है कि यहां शांति केवल एक पर्यटन आकर्षण नहीं, बल्कि शहर के ऐतिहासिक चरित्र का हिस्सा है। आधुनिक शहरों के शोर से दूर यह छोटा-सा ऐतिहासिक नगर याद दिलाता है कि किसी जगह की खूबसूरती केवल उसकी चमक-दमक में नहीं, बल्कि उसके इतिहास, वास्तुकला और शांत वातावरण में भी छिपी हो सकती है।
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