
इस्लामाबाद। भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) में गरीबी (Poverty) के हालात को लेकर, पाकिस्तानी मीडिया में काफी चर्चा है। एक पाकिस्तानी चैनल पर दोनों देशों के हालात को लेकर चर्चा हुई थी। इसमें पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी (Rising Poverty) को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस वीडियो में कहा गया कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान (Pakistan) में जहां बेहद गरीब या गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले लोगों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है, वहीं भारत में गरीबी में बेहद आश्चर्यजनक कमी आई है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2011 से 2023 के बीच गरीबी में काफी कमी आई है। इस तरह भारत दुनिया में गरीबी की दर में तेजी से कमी लाने वाले देशों में से एक देश बन गया है।
बढ़ती गरीबी पर चिंता
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की गरीबी पर चिंता जताई गई है। इसके मुताबिक पाकिस्तान में दो दशकों तक गरीबी में कमी का ट्रेंड दो हजार अठारह के बाद से उल्टा हो गया। गरीबी के वैश्विक मानक के अनुसार 2011 से 2023 तक के बारह साल में भारत में अत्यंत गरीब लोग जो रोजाना तीन डॉलर से भी कम कमाते हैं। ऐसे लोगों की संख्या 27.1 फीसदी से घटकर सिर्फ 2.6 फीसदी रह गई है। करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आ चुके हैं।
पाकिस्तानी समाचार चैनल पर भारत में बढ़ते रोजगार पर भी चर्चा की गई। इसके लिए नौकरियों में महिलाओं के लिए बढ़ते मौकों को वजह बताया गया है। वहीं, पाकिस्तान में महिलाओं के घटते रोजगार के घटते मौकों पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में करीब 13 करोड़, 40 लाख तक का इजाफा हुआ। यह संख्या वर्किंग एज पॉपुलेशन में बढ़ोतरी के संकेत से दोगुनी रही।
रोजगार के आंकड़ों में इस बढ़ोतरी का बड़ा कारण ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का नियमित वेतन पर काम शुरू करने का रुझान था, जिससे हर भारतीय घर कमाने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में आगे बताया गया कि भारत में 2011 में रोजाना 4.2 डॉलर कमाने वाले लोगों की दर 57.7 फीसदी थी। यानी भारत की आधी से ज्यादा आबादी गरीब या लोअर मिडल इनकम क्लास में आती थी। मगर 2023 तक यह संख्या कम होकर 16.1 फीसदी रह गई। इस तरह करोड़ों भारतीय नागरिक गरीबी से बाहर आ गए।
वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में गरीबी के आंकड़े चिंताजनक हैं। गरीबी के वैश्विक मानदंडों के अनुसार, मिडिल ईस्ट, नॉर्थ अफ्रीका और अफगानिस्तान के पूरे क्षेत्र के 48 फीसदी बेहद गरीब लोग पाकिस्तान में रहते हैं। यानी इस क्षेत्र के हर दो में से एक गरीब पाकिस्तानी है। इनकी दैनिक आय तीन डॉलर से भी कम है। इसके अलावा, वर्ल्ड बैंक के ग्राफ के अनुसार 2010 से 2018 तक पाकिस्तान में भी तीन डॉलर डेली से कम आय वाले बेहद गरीब लोगों की दर में कमी आई थी। 2018 में यह दर 20 फीसदी से नीचे चली गई थी, मगर उसके बाद गरीबी की दर फिर से बढ़नी शुरू हो गई। 2024 में अति गरीब लोगों की दर बढ़कर 23 फीसदी हो गई।
इसी तरह दैनिक 4.2 डॉलर आमदनी वाले पाकिस्तानियों की संख्या 48 फीसदी से कम है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में गरीबी की राष्ट्रीय दर भी बढ़ती जा रही है। यह दर 2018 में 19 से 22 प्रतिशत थी। 24-25 में बढ़कर 29 फीसदी हो गई, जबकि पाकिस्तान में गरीबी में बढ़ोतरी सभी प्रांतों के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रिकॉर्ड की गई है। और इसकी बड़ी वजह लगातार बढ़ती महंगाई है। यहां पर विकास न के बराबर है और राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट ज्यादा है।
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