
नई दिल्ली । केंद्र सरकार (Central Government) ने कहा कि कर्नाटक में जांचे गए सभी 56 सैंपल (All 56 Samples tested in Karnataka) तय ई20 मानकों पर खरे उतरे (Met the prescribed E20 Standards) ।
केंद्र सरकार ने शनिवार को कर्नाटक के कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल में तय सीमा से ज्यादा इथेनॉल मिलाने के दावों को खारिज कर दिया। केंद्र ने राज्य द्वारा अपनाई गई सैंपलिंग और जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि देशव्यापी गुणवत्ता निगरानी के तहत राज्य में जांचे गए सभी 56 सैंपल तय ई20 मानकों पर खरे उतरे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि तीन सरकारी तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने स्पष्ट किया है कि 26-31 प्रतिशत इथेनॉल मिलावट के दावे तय वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के तहत किए गए परीक्षणों से साबित नहीं होते। मंत्रालय ने बयान में कहा कि देशभर में कर्नाटक सहित इन तीनों कंपनियों द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला ई20 पेट्रोल आईएस 17021 के अनुरूप है, जो इथेनॉल-मिश्रित मोटर गैसोलीन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का मानक है।
मंत्रालय ने कहा कि तेल कंपनियों ने अक्टूबर 2026 के दौरान अपनाई गई सैंपलिंग प्रक्रिया और जांच पद्धति पर चिंता जताई है। मंत्रालय के अनुसार, “मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति, वितरण और कदाचार की रोकथाम का विनियमन) आदेश, 2005, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया गया है, मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस (एमडीजी) 2024 के साथ मिलकर सैंपल लेने, रखने, जांच और परिणाम बताने की एक तय प्रक्रिया बताता है।” तय प्रक्रिया के तहत छह एक-लीटर के सैंपल लिए जाने हैं, जिनमें से दो डीलर को दिए जाते हैं, दो तेल कंपनी या विभाग के पास रखे जाते हैं और दो नामित प्रयोगशाला को भेजे जाते हैं। सरकार ने कहा कि सितंबर 2026 के दौरान लिए गए सैंपल राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से नामित ओएमसी प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे और जरूरी गुणवत्ता मानकों पर उनकी जांच की गई थी। हालांकि, इसके बाद अक्टूबर में हुई जांच में कथित तौर पर ओएमसी प्रतिनिधियों की भागीदारी के बिना ही सैंपल लिए गए। कंपनियों को राज्यस्तरीय समन्वयक के माध्यम से मांगने के बावजूद संबंधित रिटेंशन सैंपल, आउटलेट-वार पूरी जानकारी या लैब रिपोर्ट नहीं मिली है।
ओएमसी ने यह भी बताया कि रिपोर्ट किए गए निष्कर्ष कंट्रोल ऑर्डर के तहत तय प्रयोगशाला के बजाय एक थर्ड पार्टी प्रयोगशाला द्वारा जारी प्रमाणपत्रों पर आधारित थे। इसके अलावा, प्रमाणपत्रों में पूरी तकनीकी जानकारी नहीं दी गई थी, जिसमें लागू मानक परीक्षण विधि, डाइल्यूशन प्रक्रिया और इथेनॉल सामग्री तय करने के लिए इस्तेमाल की गई संदर्भ सामग्री शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि इन कमियों के कारण रिपोर्ट किए गए इथेनॉल स्तर का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका और कंपनियों और डीलरों को दोबारा जांच कराने का मौका भी नहीं मिला। मंत्रालय ने प्रमाणपत्रों में बताई गई घनत्व रीडिंग में गड़बड़ी की ओर भी इशारा किया। कहा गया कि 26-31 प्रतिशत इथेनॉल होने का दावा वाले सैंपलों का घनत्व ओएमसी द्वारा जांचे गए ई20 सैंपलों से भी कम दिखाया गया। ओएमसी/ सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) क्वालिटी कोऑर्डिनेशन सेल की जांच के तहत 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए 893 ई20 सैंपलों की रिफाइनरी और ओएमसी क्वालिटी कंट्रोल लैब में आईएल 17021, अनुलग्नक ‘सी’ के तहत इथेनॉल सामग्री के लिए जांच की गई। इनमें से 330 सैंपल आईओसीएल के, 280 बीपीसीएल के और 283 एचपीसीएल के थे। सभी 893 सैंपलों में इथेनॉल तय 19-21 प्रतिशत की सीमा में पाया गया। खास बात यह है कि कर्नाटक में जांचे गए सभी 56 सैंपल, जो अलग-अलग जगहों और तीनों ओएमसी से थे, वे भी मानकों के अनुरूप पाए गए। उनमें इथेनॉल की मात्रा 19 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच थी, जिसका औसत 19.30 प्रतिशत था।
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