
नई दिल्ली। अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करे और पिछले महीने हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन करे।
हालांकि, बीती रात ईरान पर कोई नया अमेरिकी हमला नहीं हुआ। दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया। वहीं, कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को रोकने की जानकारी दी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने आरोप लगाया कि तेहरान ने अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम संबंधी समझौते का पालन नहीं किया। उनके मुताबिक, समझौते के बाद भी व्यावसायिक जहाजों पर हमले हुए और अमेरिकी सैनिकों की जान गई। उन्होंने कहा कि अमेरिका इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती मानता है और राष्ट्रपति ट्रंप आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य “जीत हासिल करना” है और जरूरत पड़ने पर और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उनकी पहल से दोनों देशों के बीच संघर्ष टला था और टैरिफ का मुद्दा उठाकर उन्होंने संभावित टकराव को रोकने में भूमिका निभाई।
हालांकि, भारत सरकार पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई थी और उसने ट्रंप के इस दावे को स्वीकार नहीं किया है।
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