
चंडीगढ़ । कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा (Congress MP Kumari Sailja) ने कहा कि भाजपा सरकार (BJP Government) आवश्यक खाद्य वस्तुओं की जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर सख्ती से रोक लगाए (Must strictly curb hoarding and profiteering of Essential Food Items) ।
सांसद ने कहा कि दाल, चीनी और खाद्य तेल जैसी आवश्यक वस्तुएं उचित दरों पर उपलब्ध कराने के साथ बिजली, रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थों पर करों में राहत दी जाए, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार सम्मानपूर्वक अपना घर चला सकें। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार महंगाई नियंत्रित होने के दावे कर रही है, जबकि रसोई से लेकर गृहस्थी चलाने तक की लगभग हर आवश्यक वस्तु और सेवा महंगी होती जा रही है। कुमारी सैलजा ने कहा कि अगस्त में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई। हरियाणा में महंगाई दर 3.92 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में यह 4.46 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.38 प्रतिशत रही। इससे स्पष्ट है कि महंगाई की सबसे अधिक मार गांवों, किसानों, मजदूरों और सीमित आय वाले परिवारों पर पड़ रही है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में प्याज के दाम करीब 48 प्रतिशत, लहसुन के 44 प्रतिशत, चीनी के 29 प्रतिशत और अरहर दाल के दाम 6.5 प्रतिशत बढ़े हैं। आटा पिसाई, दूध, बिजली, कपड़े, चप्पल सब महंगे हुए और मकान का किराया भी महंगा हुआ है। आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने के कारण परिवारों को भोजन, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जैसे जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि जब खाद्य वस्तुओं, बिजली, परिवहन, शिक्षा, उपचार और आवास से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं तो गरीब तथा मध्यम वर्ग अपना बजट कैसे संभाले। महंगाई का वास्तविक सच सरकारी दावों में नहीं, बल्कि बाजार की बढ़ती कीमतों और जनता की खाली होती जेब में दिखाई दे रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि बच्चों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र में नाम अथवा जन्मतिथि की गलती ठीक करवाने के लिए परिवारों से हजारों रुपये अतिरिक्त शुल्क लेना अन्यायपूर्ण है। 6 से 9 साल पुराने प्रमाणपत्र के लिए 3 हजार रुपये, 9 से 12 साल के लिए 6 हजार रुपये, 12 से 15 साल के लिए 9 हजार रुपये और 15 साल से अधिक पुराने प्रमाणपत्र में सुधार के लिए 10 हजार रुपये शुल्क गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ है। सरकार बढ़ा हुआ शुल्क तत्काल वापस लेकर त्रुटि सुधार प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और न्यूनतम शुल्क वाली बनाए।
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