
मध्य प्रदेश। के खंडवा (Khandwa) में कुत्तों की नसबंदी (Dog Sterilization) से जुड़े मुद्दे को लेकर किया गया अनोखा प्रदर्शन (Protest) अब सुरक्षा की चिंता तक पहुंच गया है। कुछ दिन पहले एक युवक डॉगी मास्क (Dog Mask) पहनकर जिला कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचा था। उसका वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते यह प्रदर्शन प्रदेश (State) से बाहर भी चर्चा में आ गया। अब युवक का कहना है कि उसकी पहचान सार्वजनिक होने पर उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंच सकता है।
मामला उस समय सामने आया जब नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मुल्लू राठौर एक युवक को कुत्ते का मास्क पहनाकर कलेक्ट्रेट में अधिकारियों के सामने ले गए। इस दौरान नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण केंद्र को लेकर करीब 40 लाख रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। प्रदर्शन का तरीका सामान्य विरोध से अलग था, इसलिए इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ।
वायरल वीडियो में युवक डॉगी का मास्क पहने दिखाई देता है। प्रदर्शन के जरिए कुत्तों से जुड़ी समस्या और नसबंदी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की गई। इसके बाद मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय भी बन गया। कांग्रेस की ओर से इसे नई पीढ़ी के विरोध प्रदर्शन के तरीके से जोड़कर देखा गया, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे लोकप्रियता हासिल करने के लिए किया गया स्टंट बताया।
इसी बीच नगर निगम प्रशासन ने नसबंदी से जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। निगम आयुक्त प्रियंका राजावत के अनुसार पिछले चार वर्षों में 7,768 कुत्तों की नसबंदी की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन की प्रक्रिया ई-टेंडर के माध्यम से की गई और इसे पारदर्शी तरीके से संचालित किए जाने की बात कही गई है।
प्रदर्शन करने वाले युवक का कहना है कि उसके द्वारा उठाई गई आवाज के बाद उसका चेहरा और प्रदर्शन देशभर में चर्चा में आ गया है। इसी वजह से उसे अब उन लोगों से खतरा महसूस हो रहा है, जिनके खिलाफ उसने अपनी बात रखी थी। युवक फिलहाल अपना नाम और चेहरा सार्वजनिक नहीं करना चाहता। उसका कहना है कि पहचान सामने आने से उसके या उसके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
हालांकि युवक को उम्मीद है कि उसके प्रदर्शन के बाद प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और जिन आरोपों को लेकर उसने आवाज उठाई है, उनकी निष्पक्ष जांच होगी। वह चाहता है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले की एक अहम कड़ी खंडवा में सामने आ रहे डॉग बाइट के मामले भी हैं। संबंधित चिकित्सा विभाग के अनुसार पिछले महीने जिले में 250 से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आए थे। वर्ष 2022 से अब तक जिले में 12 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आने की बात कही गई है।
रेबीज नियंत्रण को लेकर चल रहे सरकारी कार्यक्रम के कारण जिले में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में खंडवा में रेबीज से मौत का कोई मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में डॉग बाइट, नसबंदी व्यवस्था और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर प्रशासन के सामने प्रभावी समाधान की चुनौती बनी हुई है।
फिलहाल डॉगी मास्क वाला प्रदर्शन सोशल मीडिया पर चर्चा में है, लेकिन इसके साथ उठे सुरक्षा और भ्रष्टाचार के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। युवक की सुरक्षा संबंधी चिंता के बीच प्रशासन के सामने अब मामले की निष्पक्षता से पड़ताल करने और लोगों का भरोसा बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
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