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SC के एक और पूर्व जज ने चंद्रचूड पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- CJI बनने को कुछ भी करने को थे तैयार!

October 27, 2026

नई दिल्ली। डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) यानी भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (Former Chief Justice of India) को लेकर बयानबाजी का दौर जारी है। अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू (Former Judge Markandey Katju) ने उनपर न्यायपालिका को शर्मसार करने के आरोप लगाए हैं। खास बात है कि यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल की आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में अदालत में हुए घटनाक्रमों का जिक्र किया गया है।

पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने लिखा, ‘डीवाई चंद्रचूड़ पूरी तरह से करियर बनाने में लगे रहने वालों में से थे। जो भारत का मुख्य न्यायाधीश बनने के लिए किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार रहते थे। जिसके लिए वह अपनी इंसाफ की शपथ से धोखा किया। CJI बनने के बाद भी उन्होंने न्यायपालिका को शर्मिंदा किया। उदाहरण के लिए उन्होंने मोदी को अपने आवास पर गणेश पूजा के लिए बुलाया था।’


  • हालांकि, जस्टिस चंद्रचूड़ के कार्यकाल को लेकर एक्सपर्ट्स का रुख अलग है। एक ओर जहां संविधान संबंधी मामलों के विशेषज्ञ और सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी जस्टिस चंद्रचूड़ के कार्यकाल को स्वर्णिम समय बताते हैं। साथ ही उन्होंने सरकार को लेकर ज्यादा विनम्र होने के आरोपों से भी इनकार किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विकास सिंह जस्टिस कौल का समर्थन कर रहे हैं।

    किताब का क्या है मामला
    पूर्व जज संजय किशन कौल ने कॉलेजियम से जुड़े फैसलों का जिक्र किया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाए हैं कि पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा विनम्र थे। जस्टिस कौल ने किताब में लिखा है कि पांच नामों पर पहले ही सहमति बन गई थी, लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार के नाम को अचानक सामने रख दिया और उस पर सरकार की राय जानने का विचार जाहिर किया।

    उन्होंने लिखा, ‘तब के सीजेआई मुझे एक अलग कमरे में ले गए और पूछने लगे कि क्या उन्हें सरकार की राय जानने के लिए फोन करना चाहिए।’ हालांकि, यह पूछे जाने पर कि क्या तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश सरकार को खुश करने की कोशिश कर रहे थे या उसकी पूर्व मंजूरी लेना चाहते थे, जस्टिस कौल ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था। लेकिन, हुआ यह था कि उन्होंने पहले मेरे साथ नामों पर चर्चा की थी।’

    उन्होंने कहा, ‘हम पांच नामों पर सहमत हो गए थे और मुझे लगा था कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी इन नामों से सहमत होंगे। लेकिन कॉलेजियम की बैठक में जाने से ठीक पहले छठा नाम मेरे सामने रखा गया। मैंने कहा कि यह नाम मुझे स्वीकार्य नहीं है और न ही स्वीकार्य होगा।’

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