
नई दिल्ली ।UPI (Unified Payments Interface) लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) यानी MDR को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने नए MDR फ्रेमवर्क पर केंद्र सरकार को निशाना बनाया है। उन्होंने इसे ‘मोदी टैक्स’ बताते हुए वापस लेने की मांग की है। इसी बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) की एक पुरानी रिपोर्ट चर्चा में आ गई है, जिसमें UPI के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी।
खास बात यह है कि इस समिति में कांग्रेस के पांच सांसद शामिल थे। इनमें पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के अलावा मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। समिति ने 12 अगस्त को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में UPI के लिए टियर आधारित MDR या राजस्व व्यवस्था लागू करने की जरूरत बताई थी। रिपोर्ट में इस व्यवस्था को बिना देरी अधिसूचित कर लागू करने की बात कही गई थी।
यह रिपोर्ट ऐसे समय चर्चा में आई है, जब UPI के नए शुल्क ढांचे को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में डिजिटल भुगतान व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंता जाहिर की थी। उसके अनुसार UPI और RuPay पर जीरो-MDR नीति से पैदा होने वाली लागत की भरपाई के लिए 2026-27 के बजट में 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
रिपोर्ट में UPI के बढ़ते इस्तेमाल को भी आधार बनाया गया था। इसमें हर महीने 150 अरब तक लेनदेन और 60 करोड़ नए यूजर्स जुड़ने का अनुमान बताया गया था। समिति के अनुसार, इसके बावजूद मौजूदा सरकारी प्रोत्साहन राशि उद्योग की वास्तविक लागत का केवल 11 प्रतिशत और संभावित MDR संग्रह का करीब 14 प्रतिशत ही कवर करती है। समिति ने इसे संरचनात्मक फंडिंग गैप बताया था।
वित्त संबंधी स्थायी समिति ने यह भी कहा था कि UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए व्यवहार्य राजस्व व्यवस्था जरूरी है। इसके पीछे लगातार सरकारी खजाने पर पड़ने वाले दबाव को कम करने की जरूरत बताई गई थी। रिपोर्ट में हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर संतुलित MDR लागू करने के लिए मौजूद कानूनी व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया था।
समिति के मुताबिक, MDR व्यवस्था लागू करने में देरी होने पर पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर अपर्याप्त सब्सिडी पर निर्भर रह सकते हैं। इसका असर साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी रोकने और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश पर पड़ने की आशंका रिपोर्ट में जताई गई थी।
दूसरी ओर राहुल गांधी ने नए UPI MDR फ्रेमवर्क को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने सरकार पर अमेरिका के दबाव में आने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री से मजबूती दिखाने की अपील की। एक वीडियो में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का संदर्भ देते हुए उनके राजनीतिक रुख से जुड़ी बात भी कही और इसके बाद नए UPI फ्रेमवर्क पर प्रधानमंत्री मोदी के रुख पर सवाल उठाया।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है और यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी। व्यक्ति से व्यक्ति UPI लेनदेन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा।
छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। MDR को सरकार की ओर से लगाया गया टैक्स या सरकार और NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं बताया गया है। इससे मिलने वाली राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और पेमेंट एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स जैसे हिस्सेदारों के बीच वितरित की जाएगी। ऐसे में UPI शुल्क पर जारी राजनीतिक बहस के बीच पुरानी समिति रिपोर्ट में शामिल कांग्रेस सांसदों की भूमिका चर्चा का अहम हिस्सा बन गई है।
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