
कटनी। बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश्वर और कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen-Z आंदोलन (Gen-Z Protests) को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है।
इन दिनों मध्य प्रदेश के कटनी जिले के दौरे पर पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने कुठला क्षेत्र में शिष्यों द्वारा निर्मित ‘बागेश्वर बालाजी’ मठ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने युवाओं से संवाद, संयम और मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
‘गाली-गलौज हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं’
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन विरोध के दौरान किसी की मां, बहन या परिवार के लिए अपशब्द कहना भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अनुरूप नहीं है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी बात शालीन और मर्यादित भाषा में रखें।
युवाओं से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। ऐसे समय में समाज को टकराव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए।
कांवड़ यात्रा और सावन पर भी दी सीख
उन्होंने सावन माह और कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं से भगवान शिव की भक्ति पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने की अपील की। साथ ही कहा कि आस्था के नाम पर ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों या समाज में विवाद की स्थिति बने।
प्रेम, संयम और संस्कार का दिया संदेश
अपने संबोधन के अंत में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी संस्कृति, संस्कार और सामाजिक सौहार्द है। उन्होंने लोगों से प्रेम, धैर्य और शांति बनाए रखने तथा मर्यादित आचरण अपनाने का आह्वान किया।
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