
चेन्नई। पट्टाली मक्कल काची के नेता अंबुमणि रामदास ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे ऐसे विधायी कदम उठाएं, जिससे एक जनवरी 2009 या उसके बाद जन्मे युवाओं के लिए धूम्रपान और सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जा सके, ताकि एक धूम्रपान-मुक्त पीढ़ी तैयार की जा सके।
पत्र में उन्होंने कहा कि यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह सुनिश्चित करेगा कि आने वाली पीढ़ियां कानूनी रूप से तंबाकू उत्पादों तक कभी पहुंच न बना सकें। अंबुमणि ने कहा कि वह यह पत्र गंभीर चिंता और जिम्मेदारी के साथ लिख रहे हैं, क्योंकि धूम्रपान और तंबाकू का उपयोग लाखों भारतीयों के जीवन के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बना हुआ है, खासकर युवाओं के लिए।
उन्होंने दावा किया कि भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों और मौतों का बोझ बहुत अधिक है। वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान के अनुसार, लगभग 26.7 करोड़ भारतीय तंबाकू का उपयोग करते हैं, यानी हर पांच में से एक व्यक्ति।
उन्होंने कहा, हर साल तंबाकू के कारण सीधे तौर पर 13.5 लाख से अधिक मौतें होती हैं, जबकि, दूसरे के धुएं के संपर्क में आने से (परोक्ष धूम्रपान से) कुल मिलाकर लगभग 23 लाख मौतें होती हैं। उन्होंने इसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक शोध स्पष्ट रूप से साबित करते हैं कि तंबाकू कैंसर और कई गंभीर बीमारियों जैसे हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियां और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है।
उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 40 से 50 फीसदी कैंसर के मामले तंबाकू से जुड़े हैं और हर साल करीब 4.7 लाख मौतें तंबाकू के कारण होने वाले कैंसर से होती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ब्रिटेन की तरह एक सख्त कानून बनाया जाए, जिसमें एक निश्चित वर्ष के बाद जन्मे लोगों के लिए तंबाकू उत्पादों की बिक्री और सेवन पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम धीरे-धीरे भारत को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
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