ढाका। बांग्लादेश ने (Bangladesh) ने पद्मा नदी पर एक बड़ी बांध परियोजना को मंजूरी देकर जल प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य भारत के फरक्का बैराज (Farakka Barrage) के प्रभाव को कम करना और देश के भीतर जल भंडारण क्षमता बढ़ाना है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच हुई 1996 की गंगा जल बंटवारा संधि इस साल दिसंबर में समाप्त होने वाली है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री Tarique Rahman की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय आर्थिक परिषद कार्यकारी समिति (ECNEC) ने परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दी है। इसकी अनुमानित लागत 34,497.25 करोड़ टका बताई गई है।
सरकार का दावा है कि परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश के वित्त पोषण से तैयार की जाएगी और इसे 2033 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे राजशाही, ढाका और बरीसाल डिवीजन के कई जिलों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
शाहिदुद्दीन चौधरी ने कहा कि पद्मा बांध बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित से जुड़ा मामला है और इसके लिए भारत से किसी अलग चर्चा की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत जारी है। मंत्री ने कहा कि साझा नदियों से जुड़े मुद्दे अलग हैं और उन पर दोनों देशों के बीच संवाद चलता रहेगा।
भारत ने वर्ष 1975 में पश्चिम बंगाल में Farakka Barrage का निर्माण किया था। इसका उद्देश्य गंगा के पानी को हुगली नदी की ओर मोड़कर कोलकाता बंदरगाह में जमा गाद को साफ करना और जहाजों की आवाजाही बनाए रखना था।
भारत का हमेशा से कहना रहा है कि यह परियोजना कोलकाता पोर्ट को बचाने और नदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए जरूरी थी।
Bangladesh लंबे समय से फरक्का बैराज को लेकर चिंता जताता रहा है। वहां के विशेषज्ञों का मानना है कि सूखे के मौसम में पानी का प्रवाह कम होने से नदियों का जलस्तर गिरता है और खेती पर असर पड़ता है।
इसके अलावा, बांग्लादेश का यह भी कहना है कि मीठे पानी की कमी के कारण समुद्र का खारा पानी अंदर तक पहुंच रहा है, जिससे कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है।
भारत और बांग्लादेश के बीच Ganges Water Sharing Treaty को दोनों देशों के जल संबंधों का अहम आधार माना जाता है। इस समझौते के जरिए दोनों देश गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर सहमति से काम करते रहे हैं।
अब संधि की अवधि समाप्त होने से पहले बांग्लादेश की नई परियोजना ने क्षेत्रीय जल राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है।
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