
नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027 (Payment and Settlement Systems (Amendment) Bill, 2027) बीते मंगलवार को संसद (Parliament) में पेश किया है. इस बिल को लेकर लगातार विपक्ष मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है. इस बिल के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate- MDR) लागू करने की बात कही गई है. यह चार्ज 2000 रुपये से ज्यादा की यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू किया जा सकता है. यानी अगर 2000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट एकबार में किया जाता है, तो MDR चार्ज देना होगा।
संसद में विधेयक पेश होने के बाद से ही कन्फ्यूजन इस बात का है कि आखिर ये चार्ज किसपर लागू होगा. विपक्ष लगातार सरकार पर इसे लेकर निशाना साधता नजर आया. अब सरकार ने खुद साफ-साफ बता दिया है कि ये MDR Charge किस पर लागू होगा. वित्त मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए तस्वीर साफ की है।
MDR पर वित्त मंत्री का कांग्रेस पर पलटवार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश के इस दावे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी कि सरकार सभी UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ कर रही है. MDR पर उठ रहे सवालों और विपक्ष के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता झूठी अफवाह फैला रहे हैं. वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि गलत जानकारी फैलाने से पहले, @Jairam_Ramesh जी, कृपया इस पर विचार करें।
अपनी पोस्ट में FM ने तस्वीर साफ करते हुए कहा, ‘अगर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू की जाती है, तो वह सिर्फ और सिर्फ व्यापारियों पर लागू होगी, ग्राहकों पर नहीं. इसका अंतिम उपयोगकर्ताओं या ग्राहकों पर असर नहीं होता. इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे, इनोवेशन और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी. यूपीआई के सभी उपयोगकर्ता इस निवेश का लाभ उठाएंगे।
बता दें कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन को संसाधित करने के लिए बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य मध्यस्थों को भुगतान करते हैं।
‘MDR पर अभी अंतिम फैसला नहीं’
निर्मला सीतारमण ने अपनी पोस्ट में आगे एक और बात साफ की है. उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनपीसीआई (NPCI) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति ने अभी तक एमडीआर पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. यह संसद द्वारा कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित करने के बाद ही होगा, जिसमें पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम अधिनियम, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।
सिर्फ बड़े व्यापारियों पर एमडीआर!
एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं या छोटे व्यापारियों को प्रभावित करना नहीं है. बल्कि चर्चाओं में मुख्य रूप से MDR केवल बड़े व्यापारियों पर लगाने पर जोर दिया गया है, जिनमें प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियां और निर्धारित सालाना कारोबार लिमिट से अधिक वाले बिजनेस शामिल हैं. छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन और व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई पेमेंट प्रस्तावित ढांचे से बाहर रहने की उम्मीद है. उन्होंने ये भी कहा कि MDR को फिर से लागू करने पर करीब दो सालों से चर्चाएं चल रही हैं।
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