
उज्जैन। भूमि के अंतरण यानी रजिस्ट्री के साथ ली जाने वाली स्टाम्प ड्यूटी में उपकर की राशि का इस्तेमाल ग्रामीण विकास से जुड़े प्रोजेक्टों में किया जाएगा। साथ ही कान्ह नदी डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट के लिए 358 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति हुई कैबिनेट बैठक में दी गई। प्रदेश में स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए भी 3 हजार करोड़ रुपए से अधिक की योजनाएं मंजूर की गई और दमोह-कटनी मार्ग के निर्माण के लिए 4470 करोड़ रुपए की प्रशासकीय मंजूरी दी गई।
अब विमुक्त घुमंतु और अद्र्धघुमंतु कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावास, सामुदायिक कल्याण केन्द्र और आश्रमों में रहने वाले लोगों को भी 1 रुपए प्रति किलो की दर से राशन उपलब्ध कराया जाएगा। कक्षा पहली से 8वीं तक के बच्चों के लिए अब यूनिफॉर्म खरीदने की राशि दी जाएगी, जिसके लिए कैबिनेट ने 348 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में साढ़े 24 हजार करोड़ से अधिक की योजनाओं को मंजूरी दी गई, जिसमें अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय भी लिया गया, जिसमें पुलिस आरक्षण सहित विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक के पदों पर अग्रिवीरों को 20 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। मंत्रि-परिषद ने उज्जैन की कान्ह डायवर्शन क्लोस डक्ट परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 358 करोड़ 22 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उज्जैन की पवित्र शिप्रा नदी में प्रदूषित कान्ह नदी के पानी को प्रवेश करने से रोकना है। यह योजना 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के दृष्टिगत निर्माणाधीन है। इसके तहत प्रदूषित कान्ह नदी के पानी को 30.15 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग और ढकी हुई नहर के माध्यम से मोड़ कर प्रदूषित पानी को गंभीर नदी तक पहुंचाना है। मंत्रिपरिषद ने म.प्र. उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत भूमि के अंतरण पर उपकर का ग्रामीण विकास निधि में अंतरण की योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 3,580.22 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में भूमि व संपत्तियों का क्रय-विक्रय और उनका पंजीयन एक सतत वैधानिक प्रक्रिया है।