
oplus_32
उज्जैन। शहर में चल रहा सीवर प्रोजेक्ट कितना कारगर और लोगों की सहूलियत वाला होगा, ये तो समय बताएगा, लेकिन बीते 3 साल से इस प्रोजेक्ट के कारण शहरभर की सड़कों की हालत बिगड़ गई है। पहले सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़कों को खोदा गया। लंबे इंतजार के बाद सड़कों की मरम्मत हुई तो अब सीवर लाइन से कनेक्शन देने के नाम पर फिर से सड़कों को बेतरतीब ढंग से खोदा गया और ऐसे ही छोड़ दिया गया।
गौरतलब है कि नगर निगम ने लगभग 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के सीवर प्रोजेक्ट के तहत शहरभर में 540 किलोमीटर से ज्यादा सीवर लाइन बिछाई है। इसके लिए शहर की कॉलोनी-मोहल्लों व गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक की खुदाई हुई। सीवर लाइन डलने के कई सड़कों की मरम्मत अभी तक नहीं हुई। कई सड़कों की मरम्मत हो गई तो कुछ सड़कों को नगर निगम ने पूरी तरह नया बनाया है। अब इन्हीं सड़कों को कनेक्शन के लिए फिर से खोदा जा रहा है। गौरतलब है कि 540 किमी लंबी सीवर लाइन में 15 हजार से ज्यादा मेनहोल हैं, इन मेनहोल से शहर के 1 लाख से ज्यादा घरों के सीवर कनेक्शन होने हैं। एक मेनहोल में 4 से 6 घरों के कनेक्शन किए जा रहे हैं। बस इन्हीं कनेक्शनों के लिए फिर से सड़कों की कदम-कदम पर खुदाई हो रही है।
प्रोजेक्ट में लीपा-पोती ज्यादा
टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की इस धीमी परफॉर्मेंस के कारण वर्तमान में चल रहे विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। खासकर सिंहस्थ 2028 के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण और अन्य निर्माण कार्य जगह-जगह रुके हुए हैं, जिससे शहर के नागरिकों को भारी असुविधा हो रही है। प्रोजेक्ट में बड़े आकार की पाइपलाइन सीमेंट-कांक्रीट के है, जबकि छोटे आकार की पीवीसी की तरह डबल वॉल कॉरगेटेड है। पाइप लाइन बिछाने के बाद टाटा कंपनी अब शहर के मकानों के बाथरूम के पाइप को सीवरेज लाइन से जोड़ रही है। टारगेट पूरा करने की चक्कर में चैंबर निर्माण में कॉन्ट्रेक्शन के नियमों और गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved