
नई दिल्ली. अमेरिका (US) ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में ईरान (Iran) के खिलाफ अपनी समुद्री कार्रवाई को लेकर बड़ा दावा किया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने शनिवार को कहा कि अब तक 78 कमर्शियल जहाजों (78 Vessels) को रास्ते से वापस लौटाया गया है, जबकि 4 जहाजों को “डिसेबल” कर दिया गया, ताकि वे ईरानी बंदरगाहों तक न पहुंच सकें.
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा, “16 मई तक 78 कमर्शियल जहाजों को रीडायरेक्ट किया गया है और 4 जहाजों को डिसेबल किया गया है, ताकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाकेबंदी नीति का पालन सुनिश्चित हो सके.”
दरअसल, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ होर्मुज स्ट्रेट में सख्त समुद्री निगरानी और ब्लॉकेड लागू कर रखा है. यह वही रणनीतिक समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है. अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस मार्ग का इस्तेमाल अपने आर्थिक और सैन्य हितों के लिए कर रहा है.
ईरान डील नहीं करेगा तो कीमत चुकाएगा
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के पास समझौता करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं. फ्रांसीसी चैनल BFMTV को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “अगर ईरान डील नहीं करता, तो उसे बहुत बुरा वक्त देखना पड़ेगा.” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी यह साफ नहीं है कि कोई समझौता जल्द होगा या नहीं.
शी जिनपिंग चाहते हैं होर्मुज खुले, ट्रंप ने किया दावा
ट्रंप ने पहले यह भी दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलना चाहिए. हालांकि चीन की तरफ से इस दावे की खुलकर पुष्टि नहीं की गई है. चीन ने सिर्फ इतना कहा कि यह संघर्ष “होना ही नहीं चाहिए था” और इसे जल्द खत्म होना चाहिए.
गौरतलब है कि फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव काफी बढ़ गया.
हालांकि पाकिस्तान की मध्यस्थता से अप्रैल में सीजफायर लागू हुआ था, लेकिन अब भी स्थायी समझौता नहीं हो पाया है. इसी बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर निगरानी और दबाव बनाए हुआ है.
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