नई दिल्ली। पटाखों से होने वाले प्रदूषण (pollution) पर सख्त रुख अपनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने चेतावनी दी है कि यदि पटाखों का अनियंत्रित इस्तेमाल जारी रहा, तो शहर गैस चैंबर (Gas chamber) में तब्दील हो सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में पटाखों पर प्रतिबंध से संबंधित उसका आदेश केवल गणपति उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल और सभी त्योहारों पर लागू रहेगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को जागरूकता अभियान चलाने, शिकायतों के लिए विशेष व्यवस्था बनाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
महाराष्ट्र में पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि त्योहार मनाने के नाम पर नागरिकों के साफ और स्वस्थ वातावरण में रहने के अधिकार की अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि पटाखे अनियंत्रित तरीके से फोड़े जाते रहे, तो शहरों में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ सकता है कि वहां रहना मुश्किल हो जाएगा।
जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की पीठ ने गुरुवार को पारित आदेश में मुंबई सहित महाराष्ट्र के अन्य शहरों में बढ़ते प्रदूषण, धुंध और स्मॉग पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने बताया कि दिवाली से पहले ही मुंबई के कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 425 तक पहुंच गया था। यह स्थिति प्रदूषण के गंभीर स्तर को दर्शाती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नियम और कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। नागरिकों को लगातार प्रदूषित वातावरण में रहना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में जीने का अधिकार भी शामिल है। किसी भी नागरिक को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने आचरण से दूसरे नागरिकों के मौलिक अधिकारों को नुकसान पहुंचाए। राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह शहरों को प्रदूषण मुक्त और रहने योग्य बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
पीठ ने नागरिकों से भी अपील की कि वे प्रदूषण के दीर्घकालिक दुष्परिणामों को समझें और इसे कम करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। अदालत ने साफ किया कि 22 सितंबर को जारी उसका आदेश केवल गणपति उत्सव के दौरान लागू रहने वाला निर्देश नहीं है। महाराष्ट्र में यह प्रतिबंध पूरे वर्ष और सभी त्योहारों के दौरान प्रभावी रहेगा।
सार्वजनिक सड़कों और साइलेंस जोन में पटाखों पर रोक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध को दोहराया। इसके अलावा साइलेंस जोन में भी पटाखों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। इनमें अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, अदालतों और स्कूलों के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
अदालत ने महाराष्ट्र सरकार, नगर निगमों और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक सप्ताह के भीतर जागरूकता व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके तहत स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, सार्वजनिक परिवहन और अन्य माध्यमों से लोगों को प्रदूषण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि लोगों को कम उत्सर्जन वाले ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और निर्धारित समय सीमा का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करना है।
शिकायतों के लिए बनेगी विशेष व्यवस्था, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
अदालत ने पटाखों से जुड़े नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के लिए विशेष व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है।
पीठ ने अधिकारियों को फील्ड स्टाफ के लिए डेसिबल मीटर और प्रदूषण मापने वाले अन्य उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी। अदालत के निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रदूषण नियंत्रण, नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण में जीने के मौलिक अधिकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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