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महुआ मोइत्रा मामले में CJP प्रवक्ता ने SC की टिप्पणी पर जताई आपत्ति, कहा- सांसद को कुछ हुआ तो बेंच जिम्मेदार

August 08, 2026

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हुई सुनवाई के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें महुआ मोइत्रा ने एक आपराधिक मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास (Sourav Das) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

क्या था महुआ मोइत्रा का मामला?
महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट को लेकर FIR दर्ज की गई है। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने मांग की कि सांसद को पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी जाए। वकील ने दलील दी कि पिछली बार जब महुआ अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन गई थीं, तब उन पर अंडे फेंके गए थे। ऐसे में दोबारा वहां जाने पर भीड़ की ओर से उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका है।


  • जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी से बढ़ा विवाद
    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने वर्चुअल पेशी की अनुमति देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की कि अगर वह राजनीति में आई हैं तो उन्हें अंडों से डर क्यों लगता है, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां तक अपने सीने पर झेली थीं। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस ले ली। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

    CJP प्रवक्ता सौरव दास ने जज पर उठाए सवाल
    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अदालत की टिप्पणी का मतलब यह है कि महुआ मोइत्रा को गोलियां खाने का जोखिम उठाना चाहिए। दास ने न्यायाधीशों की न्यायिक भाषा और जवाबदेही पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक अदालतों के जजों से इस तरह के न्यायिक व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती। उन्होंने न्यायिक जवाबदेही तय करने की जरूरत की बात कही।

    ‘कुछ हुआ तो बेंच जिम्मेदार होगी’
    सौरव दास ने आगे कहा कि बंगाल के मौजूदा हालात को देखते हुए यह टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने दावा किया कि यदि महुआ मोइत्रा को कुछ भी होता है तो जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच जिम्मेदार होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कार्यशील लोकतंत्र में इस तरह के आचरण वाले न्यायाधीशों से इस्तीफा लेने या महाभियोग जैसी प्रक्रिया की मांग की जा सकती है। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि यदि विपक्षी नेताओं के संदर्भ में अदालत से इस तरह की टिप्पणियां आएंगी तो आम नागरिकों की न्याय व्यवस्था से क्या उम्मीद रह जाएगी।

    कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत
    इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने कथित नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े एक मामले में महुआ मोइत्रा को 21 जुलाई को पांच अक्टूबर तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। महुआ मोइत्रा का दावा है कि उनके खिलाफ दर्ज मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट में हुई ताजा सुनवाई के बाद अब इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

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