
इंदौर। रेलवे यात्रियों को बेहतर और साफ-सुथरी यात्रा सुविधा देने के दावे करता है, लेकिन इंदौर से जुड़ी ट्रेनों में यात्रियों की शिकायतें इन दावों की पोल खोल रही हैं। कहीं स्लीपर कोच में कॉकरोच दौड़ रहे हैंए तो कहीं एसी कोच में यात्रियों को गंदे चादर और तकिए दिए जा रहे हैं। एक ट्रेन में कोच से बदबू आने और एसी ठीक से काम नहीं करने की शिकायत सामने आई, जबकि दूसरी ट्रेन में आरक्षित सीटों पर सामान्य टिकट लेकर यात्रा कर रहे यात्रियों द्वारा कब्जा जमाने की शिकायत की गई। यात्रियों ने रेलवे से शिकायत की तो अधिकारियों ने उन्हें संबंधित विभाग को भेजने और कार्रवाई का आश्वासन देकर जिम्मेदारी पूरी कर ली।
दौंड एक्सप्रेस के स्लीपर में कॉकरोच, गंदे चादर भी
इंदौर-दौंड एक्सप्रेस (22944) के एस-3 कोच में यात्रा कर रहे यात्री राकेश ने रेलवे को टैग करते हुए शिकायत की कि कोच में बड़ी संख्या में कॉकरोच दौड़ रहे हैं। यात्री ने इसका वीडियो भी रेलवे को साझा किया और स्थायी समाधान की मांग की। इसी ट्रेन के बी-5 कोच में यात्रा कर रहे एक अन्य यात्री ने गंदे और बिना धुले चादर-तकिए मिलने की शिकायत की। उन्होंने कहा ये शिकायत सिर्फ उनकी अकेले की नहीं, बल्कि सभी यात्रियों को ऐसे ही चादर-तकिए मिले है। उन्होंने गंदे तकिए का फोटो भी साझा करते हुए बताया कि यात्रा के दौरान बेहद खराब स्वच्छता व्यवस्था का सामना करना पड़ा। दोनों मामलों में रेलवे के अधिकारियों ने शिकायत को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की बात कही। संबंधित विभाग की ओर से बाद में बताया गया कि शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और ठेकेदार के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई और पेनल्टी लगाई जाएगी।
शिप्रा एक्सप्रेस में बदबू…
एसी भी ठीक नहीं
इंदौर से हावड़ा (कोलकाता) जाने वाली शिप्रा एक्सप्रेस (22911) में यात्रा कर रहे विवेक भगत ने कोच एम-2 की सीट नंबर 55 से शिकायत की। उनका आरोप था कि कोच साफ नहीं था और उसमें बहुत ज्यादा बदबू आ रही थी। इसके साथ ही एसी भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोच अटेंडेंट से मदद नहीं मिलने की बात यात्री ने कही। रेलवे सेवा ने शिकायत को दर्ज कर डीआरएम को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने की जानकारी दी। बाद में डीआरएम रतलाम ने शिकायत संबंधित विभाग को भेजने की बात कही।
जोधपुर एक्सप्रेस में आरक्षित सीटों पर सामान्य टिकट वाले
जोधपुर से इंदौर आ रही जोधपुर-इंदौर एक्सप्रेस (14801) ट्रेन में यात्रा कर रहे आयुष शर्मा ने रेलवे से शिकायत की कि उनकी आरक्षित सीटों पर सामान्य टिकट लेकर यात्रा कर रहे यात्री बैठे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सीटें 73, 74, 75 और 76 हैं, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद सीट खाली नहीं की जा रही थी। यात्री ने तत्काल टीटीई और आरपीएफ की मदद मांगी। रेलवे सेवा ने शिकायत को रतलाम मंडल के अधिकारियों तक पहुंचाया। इसके बाद संबंधित अधिकारी ने बताया कि ऑन-ड्यूटी टीटीई एवं आरपीएफ स्टाफ को यात्री की मदद के लिए अटेंड करने को कहा गया है।
सोशल मीडिया पर शिकायत के बाद ही हरकत
इन शिकायतों की खास बात यह है कि यात्रियों को ट्रेन में ही समस्या का सामना करना पड़ा और समाधान के लिए उन्हें सोशल मीडिया पर रेलवे को टैग करना पड़ा। रेलवे सेवा और मंडल अधिकारियों ने हर मामले में शिकायत संबंधित विभाग को भेजने की जानकारी दी, लेकिन सवाल यह है कि ट्रेन चलने से पहले सफाई, चादर-तकिए, एसी और कोच की व्यवस्था की जांच आखिर कौन करता है? कॉकरोच से लेकर गंदे लिनेन और बदबूदार कोच तक की शिकायतें बताती हैं कि निगरानी व्यवस्था कागजों में भले मजबूत हो, लेकिन यात्रियों को उसकी हकीकत ट्रेन के अंदर भुगतनी पड़ रही है। खासकर एसी और स्लीपर जैसे आरक्षित कोचों का किराया देने के बाद भी यदि यात्री गंदगी और अव्यवस्था से जूझ रहे हैं, तो रेलवे की सफाई और ठेका व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
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