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इंदौर: लैब रिपोर्ट में नकली घी ‘पास’, डीलर यही दिखाकर कर रहे खेल

August 31, 2026

नकली घी बनाने वाली कंपनियों का नया तरीका

इंदौर, विकाससिंह राठौर।
नकली घी (Adulterated ghee) के कारोबार में अब सिर्फ मिलावट (Adulteration) ही नहीं, बल्कि उसे सही साबित करने का भी पूरा खेल सामने आ रहा है। बाहर से आने वाले घी के कारोबारी और कंपनियां स्थानीय डीलरों (dealers) को अपने उत्पाद की लैब रिपोर्ट (lab tests) उपलब्ध करा रहे हैं। इन रिपोर्ट में घी को निर्धारित मानकों पर खरा बताया जाता है। यही रिपोर्ट डीलर आम ग्राहकों से लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम के निरीक्षण के दौरान भी अधिकारियों को दिखा रहे हैं। लेकिन विभाग इन रिपोर्ट के भरोसे नहीं रुक रहा। नमूनों की गहन जांच कराई जा रही है, जिससे घी की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें की गई मिलावट का पता लगाया जा रहा है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इंदौर सहित पूरे मध्यप्रदेश में बाहर से आने वाले घी पर विशेष निगरानी के दौरान यह तरीका सामने आया है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तरप्रदेश और आसपास के राज्यों से घी मध्यप्रदेश के बाजारों में पहुंच रहा है। कारोबारियों की ओर से डीलरों को यह भरोसा दिलाने के लिए लैब रिपोर्ट दी जा रही है कि उनका उत्पाद मानकों के अनुसार है। अधिकारियों के सामने जांच के दौरान भी ऐसी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा रही हैं।


  • चार जांच में पास दिखाकर बेचने की कोशिश
    अधिकारियों के अनुसार घी की सामान्य गुणवत्ता जांच में आरएम (रीशर्ट-मिसल वैल्यू), बीआर (ब्यूटिरो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग), आयोडीन वैल्यू और मॉइस्चर जैसे प्रमुख मानकों की जांच होती आई है। मिलावट करने वाले कारोबारी इन मानकों को ध्यान में रखकर उत्पाद तैयार कर रहे हैं, ताकि सामान्य जांच में उत्पाद मानक के करीब दिखाई दे। यही वजह है कि अब विभाग सिर्फ कारोबारी की ओर से दिखाई गई रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रह रहा। एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के मानकों में घी के लिए इनसे आगे भी कई परीक्षण निर्धारित हैं। इनमें दूध की वसा से जुड़े मानकों के साथ फैटी एसिड कंपोजिशन और बीटा-सिटोस्टेरोल जैसे संकेतकों की जांच महत्वपूर्ण है। वनस्पति तेल की मिलावट पकडऩे के लिए बीटा-सिटोस्टेरोल को महत्वपूर्ण मार्कर माना जाता है।

    एक्सपर्ट निजी लैब की ली जा रही मदद, 100 से ज्यादा मानकों पर जांच
    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम जब डीलर या वितरक के यहां पहुंचती है, तो कई मामलों में कंपनी की लैब रिपोर्ट सामने रख दी जाती है। रिपोर्ट में उत्पाद को सभी जरूरी मानकों पर पास बताया जाता है। इसके बावजूद विभाग अपने स्तर पर नमूना लेकर जांच करा रहा है। भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला मैं भी सभी एडवांस टेस्ट संभव न होने पर अब सरकार निजी एक्सपर्ट लैब की भी मदद ले रही है और ज्यादातर सैंपलों को बाहरी लैब को भेजा जा रहा है, जहां पर घी की 100 से ज्यादा मानकों पर जांच की जा रही है, जिसमें घी के मिलावटी होने की पुष्टि होने के बाद नकली घी कारोबारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है।

    1750 लीटर घी जब्त, डीलर ने दिखाया पास सर्टिफिकेट
    इसी अभियान के तहत बीते दिनों खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने स्कीम नंबर 51 स्थित मां बगलामुखी एंटरप्राइजेज पर कार्रवाई की। यहां गुजरात में निर्मित मंथन और श्री आनंद ब्रांड का घी मिला। टीम ने 18 नमूने जांच के लिए लिए और करीब 1750 लीटर घी जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत 6.80 लाख रुपए बताई गई। नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई होगी। यहां भी टीम को लैब की पास रिपोर्ट दिखाई गई।

    प्रदेशभर में बाहर से आने वाले घी पर निगरानी
    खाद्य सुरक्षा प्रशासन की निगरानी अब सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में आने वाले घी के निर्माताओं, डिपो, थोक विक्रेताओं और डीलरों से नमूने लिए जा रहे हैं। विभाग का फोकस ऐसे उत्पादों की वास्तविक गुणवत्ता जांचने पर है, जिनके साथ पहले से ‘पास’ लैब रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है। यानी नकली घी के कारोबार में अब सिर्फ उत्पाद को मानकों पर पास दिखाना ही काफी नहीं है। कारोबारी लैब रिपोर्ट के जरिए डीलरों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग अपने नमूनों की गहन जांच कर इस पूरे खेल की असलियत सामने लाने में जुटा है।

    हर डीलर दिखाने लगा ‘पास’ सर्टिफिकेट
    पिछले कुछ समय से एक ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां घी की जांच करने जाने पर डीलर्स पहले से उसकी जांच रिपोर्ट दिखा रहे हैं, जिसमें अधिकृत लैब उसे कुछ प्रमुख मानकों पर पास बता रही है। लगातार मामले सामने आने पर घी की गहन जांच कराई जा रही है और ऐसे अधिकांश मामलों में घी नकली पाया जा रहा है। इसके लिए शासन निजी लैब की भी मदद ले रहा है। – मनीष स्वामी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी

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