
नई दिल्ली. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं (leaders) सौरभ दास और आशुतोष रांका (Saurabh Das and Ashutosh Ranka) की न्यायिक हिरासत (Judicial custody) बढ़ाए जाने के मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ऑर्डर कॉपी सामने आ गई है. इस आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट रूप से बताया है कि क्यों दोनों नेताओं को फिर से 21 अक्टूबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उनके द्वारा पेश किए गए जमानतदारों को क्यों खारिज कर दिया गया.
यह ऑर्डर कॉपी ऐसे समय में सामने आई है जब CJP की कानूनी टीम ने पहले जमानतदारों को बार-बार खारिज किए जाने और हिरासत की वैधता पर सवाल उठाए थे. अब आदेश की लिखित कॉपी में मजिस्ट्रेट ने जमानतदारों की पहचान और दोनों नेताओं को अदालत के सामने पेश कराने की उनकी क्षमता को लेकर आपत्तियां दर्ज की हैं.
SEM ने अपने आदेश में कहा कि दोनों प्रतिवादियों ने 11 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत अपने बांड का जानबूझकर उल्लंघन किया और तुरंत सार्वजनिक शांति भंग की. आदेश के अनुसार, “जांच अधिकारी द्वारा पेश की गई सामग्री और आरोपियों के आचरण से यह स्पष्ट है कि उनका व्यवहार निष्पक्ष नहीं है. वे कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाते और डि-नोटीफाइड क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन करने के आदी रहे हैं.”
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं द्वारा भविष्य में इस तरह का अपराध न दोहराने का दिया गया बयान या आश्वासन, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए विश्वास जगाने में विफल रहा है.
जमानतदारों की जांच में खुली पोल!
दोनों नेताओं की ओर से पेश किए गए नए जमानतदारों पर मजिस्ट्रेट ने व्यक्तिगत रूप से जांच की. जांच में सामने आया कि एक जमानतदार के बांड और पहचान पत्र (Aadhaar/ID) में तस्वीरों का स्पष्ट अंतर था. जब उससे अन्य पहचान पत्र मांगा गया तो वह पेश नहीं कर सका और गोलमोल जवाब देने लगा.
दूसरा जमानतदार व्यक्तिगत पूछताछ के दौरान उस व्यक्ति (सौरव दास) के बारे में बुनियादी जानकारी, जैसे माता-पिता का नाम, पता आदि तक बता पाया, जिसके लिए वह जमानतदार बनने आया था. कोर्ट ने माना कि दोनों ही जमानतदारों का आरोपियों पर कोई नियंत्रण नहीं है, जो कि जमानतदार रखने का मूल उद्देश्य होता है.
अदालत ने कहा कि लोक शांति भंग होने और जनता के बीच अव्यवस्था फैलने के गंभीर अंदेशे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर SEM ने दोनों पक्षों को 2 दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब और नई जमानतदारों की सूची दाखिल करने का मौका दिया है. तब तक के लिए सुरक्षात्मक उपायों की निरंतरता को आवश्यक मानते हुए दोनों CJP नेताओं को 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
सीजेपी का आरोप
वहीं सीजेपी ने दावा किया कि SEM ने उन लोगों को जमानतदार (surety) के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जो इन दोनों नेताओं की ओर से पेश हुए थे. इससे अब तक की पुलिस कार्रवाई की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं.
CJP की ओर से पेश वकीलों ने ‘आजतक’ को बताया कि यह आदेश “कानून और सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘ड्यू प्रोसेस’और जमानतदारों को लेकर तय किए गए पुराने फैसलों का सीधा-सीधा उल्लंघन है.” वकीलों का यह भी दावा है कि पिछले 4 दिनों में SEM ने 8 अलग-अलग लोगों को जमानतदार के रूप में खारिज कर दिया है.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved