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ये राज्य बन सकता है एशिया का सबसे बड़ा EV हब? बनती है 40% गाड़ियां

June 16, 2026

तमिलनाडु: भारत में भी EV की मांग लगातार बढ़ रही है. लोग अब कम खर्च वाले और पर्यावरण के लिए बेहतर वाहनों को पसंद कर रहे हैं. दूसरी ओर कंपनियां भी नए-नए इलेक्ट्रिक मॉडल बाजार में ला रही हैं. मई 2026 में पहली बार बैटरी से चलने वाले वाहनों की हिस्सेदारी 10% के पार पहुंच गई, जो दिखाता है कि EV अब धीरे-धीरे आम लोगों की पसंद बन रहे हैं. इस बीच भारत में EV क्रांति की बात हो और तमिलनाडु का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है.

आज तमिलनाडु देश के कुल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का 50% से ज्यादा और कुल EV उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा तैयार करता है. इसी वजह से यह राज्य भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है. कई सालों से ऑटोमोबाइल उद्योग का मजबूत केंद्र रहा तमिलनाडु अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है. इस बदलाव ने घरेलू और विदेशी कंपनियों को आकर्षित किया है. हाल ही में वियतनाम की कंपनी VinFast ने भी राज्य में निवेश की घोषणा की है.

तमिलनाडु में TVS Motor, Ola Electric, Ather Energy, Greaves, Raptee Energy और Royal Enfield जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बना रही हैं. वहीं Hyundai, BYD और VinFast जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों का प्रोडक्शन हो रहा है. इसके अलावा Switch Mobility और Montra Electric राज्य को इलेक्ट्रिक बस, ट्रक और लास्ट-माइल मोबिलिटी वाहनों का भी बड़ा केंद्र बना रहे हैं. इतना ही नहीं, चेन्नई बेस्ड महिंद्रा रिसर्च वैली और IIT मद्रास जैसे संस्थान EV रिसर्च और इंजीनियरिंग को मजबूत बना रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन के लगभग हर पैमाने पर तमिलनाडु आज भारत का EV हब बन चुका है.


  • तमिलनाडु भले ही देश का सबसे बड़ा EV सेंटर हैं, लेकिन राज्य के सामने अब एक नई चुनौती है. केवल वाहन बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि EV तकनीक के महत्वपूर्ण हिस्सों में आत्मनिर्भर बनना भी जरूरी है. वर्तमान में बैटरी सेल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड वाहन सॉफ्टवेयर जैसे कई महत्वपूर्ण हिस्सों के लिए भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है. ET की रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहर EV कंपोनेंट डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग में तमिलनाडु से आगे हैं. खासकर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), व्हीकल सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में तमिलनाडु को अभी काफी काम करने की जरूरत है.

    रिपोर्ट के मुताबिक, एक और समस्या यह है कि सरकार का ज्यादा ध्यान बड़े निवेशकों और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) को आकर्षित करने पर रहा है. जबकि ऑटो उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले MSME और मध्यम स्तर के सप्लायर्स को पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाई है. इससे स्थानीय कंपोनेंट सप्लाई चेन उतनी मजबूत नहीं बन सकी जितनी होनी चाहिए थी. बैटरी सेल निर्माण को EV उद्योग की सबसे बड़ी कमजोरी माना जा रहा है. हालांकि Ola Electric जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं, लेकिन अभी यह उद्योग शुरुआती चरण में है. Ather Energy का भी मानना है कि बैटरी निर्माण, सेल उत्पादन और उससे जुड़े कच्चे माल के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं.

    अच्छी बात यह है कि मोटर कंट्रोलर, इन्वर्टर, ऑनबोर्ड चार्जर, DC-DC कन्वर्टर और ट्रैक्शन मोटर जैसे क्षेत्रों में भारत की क्षमता लगातार बढ़ रही है. Sona Comstar जैसी कंपनियां इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु को अब केवल फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए. राज्य को सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर, बैटरी तकनीक, रीसाइक्लिंग उद्योग, कच्चे माल की सप्लाई और MSME कंपनियों के विकास पर भी ध्यान देना होगा. अगर तमिलनाडु बैटरी, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में मजबूत तकनीकी क्षमता विकसित कर लेता है, तो आने वाले वर्षों में यह केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का सबसे बड़ा EV और डीप-टेक हब बन सकता है.

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