img-fluid

आपका 20 रुपये का सिक्का कहीं नकली तो नहीं? सहारनपुर में पकड़ी फैक्ट्री, रोज बनते थे 12 हजार सिक्के

September 14, 2026

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले (Saharanpur district) में नकली सिक्के (Counterfeit coins) बनाने वाली फैक्ट्री का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। तीतरों क्षेत्र में चल रही इस फैक्ट्री से अंतरराज्यीय गिरोह (Inter-state gang) के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह करीब पांच से छह रुपये की लागत में 20 रुपये का नकली सिक्का तैयार करता था और उसे एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेच देता था। इसके बाद एजेंट इन सिक्कों को बाजार में असली मुद्रा के तौर पर चलाते थे।

रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता

सहारनपुर में 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी का मामला सामने आने के बाद अब 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्कों के कारोबार का खुलासा हुआ है। तीतरों में पकड़ी गई फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर नकली सिक्कों के उत्पादन का पूरा सेटअप तैयार किया गया था।

पुलिस के अनुसार, फैक्ट्री में छह मशीनों के जरिए रोजाना करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता थी। छापे के दौरान पुलिस ने 6,400 तैयार नकली सिक्के, करीब पांच लाख रुपये मूल्य के अधबने सिक्के और 59 डाई बरामद की हैं। बरामद सामान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी कर रखी थी।


  • नेपाल और थाईलैंड तक जुड़ा नेटवर्क

    पुलिस जांच में सामने आया है कि नकली सिक्कों का यह नेटवर्क नया नहीं है। गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का नाम वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में भी सामने आ चुका है। उस समय उसके संपर्क नेपाल और थाईलैंड तक पाए गए थे।

    पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है। पुलिस से बचने के लिए नेपाल में छिपने के दौरान उसने वहां भी नकली सिक्कों के निर्माण का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी। अब कई वर्षों बाद इसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में तैयार किए जाने की बात सामने आई है।

    आठ लोग संभाल रहे थे अलग-अलग जिम्मेदारियां

    जांच के अनुसार गिरोह में करीब आठ लोग अलग-अलग काम संभाल रहे थे। कुछ सदस्य मशीनों और उत्पादन की जिम्मेदारी देखते थे, जबकि अन्य तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाने और बाजार में खपाने का काम करते थे। गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था, ताकि किसी एक सदस्य के पकड़े जाने पर पूरा नेटवर्क सामने न आए।

    पुलिस ने मौके से आठ मोबाइल फोन और सात रजिस्टर भी बरामद किए हैं। इनके जरिए गिरोह के लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पांच आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

    छह रुपये में तैयार, 12 से 15 रुपये में बिक्री

    पुलिस पूछताछ में नकली सिक्कों के कारोबार में होने वाले मुनाफे का भी खुलासा हुआ है। एक 20 रुपये का नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये की लागत आती थी। इसके बाद इसे एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेच दिया जाता था।

    एजेंट इन सिक्कों को उनके वास्तविक अंकित मूल्य यानी 20 रुपये के रूप में बाजार में चलाते थे। कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के कारण गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को अपने कारोबार का आधार बनाया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितने नकली सिक्के बाजार में पहुंचाए जा चुके हैं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

    Share:

  • लद्दाख बॉर्डर से बड़ी खबर: LAC पर चीनी सेना के कदम पीछे, भारतीय सेना की मजबूत पकड़

    Mon Sep 14 , 2026
    नई दिल्ली. भारत-चीन (India-China) सीमा (border) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में उत्तरी सीमाओं पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की तैनाती में बड़ी कमी देखी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved