
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने के फैसले पर अदालत में सुनवाई हुई। डिस्ट्रिक्ट जज टिमोथी केली ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि मीडिया संस्थानों को बैन से पहले अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
जज केली ने सुनवाई के दौरान तत्काल कोई आदेश जारी नहीं किया। उन्होंने कहा कि मामले पर जल्द फैसला सुनाया जाएगा। वहीं, CNN, MS NOW और Politico ने अदालत से मांग की है कि उनकी व्हाइट हाउस एक्सेस को तत्काल बहाल किया जाए, जब तक कि उनकी कानूनी चुनौती पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता।
पुराने अदालती फैसलों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स के दो पुराने फैसलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन फैसलों के अनुसार व्हाइट हाउस की प्रेस एक्सेस वापस लेने से पहले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को उचित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए।
केली ने कहा कि सरकार भले ही इन पुराने फैसलों को गलत मानती हो, लेकिन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज के तौर पर उन्हें फिलहाल मौजूदा कानूनी मिसालों का ही पालन करना होगा। उन्होंने खास तौर पर प्रशासन से सवाल किया कि यदि मीडिया संस्थानों पर प्रतिबंध पहले ही लगा दिया गया था, तो बाद में भेजे गए पत्र किस तरह उन्हें पहले से नोटिस देने और अपना जवाब रखने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।
प्रशासन बोला- मीडिया एक्सेस कोई अधिकार नहीं
ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि व्हाइट हाउस में मीडिया की पहुंच कोई कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति के पास सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से मीडिया संस्थानों की पहुंच सीमित करने का अधिकार है।
सरकारी वकील ने यह भी कहा कि इन तीनों मीडिया संस्थानों की कुछ रिपोर्टों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल उठे थे। प्रशासन ने अपने पक्ष में मिसाइल भंडार, व्हाइट हाउस में बन रहे बॉलरूम और रिपब्लिकन पार्टी के मिडटर्म कन्वेंशन से संबंधित रिपोर्टों का हवाला दिया।
मीडिया संस्थानों ने फर्स्ट अमेंडमेंट का मुद्दा उठाया
CNN, MS NOW और Politico ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दायर मुकदमे में कहा है कि व्हाइट हाउस से बैन करना अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा उचित कानूनी प्रक्रिया के अधिकार का उल्लंघन है। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि ट्रंप ने उन रिपोर्टों के चलते कार्रवाई की, जो उन्हें पसंद नहीं थीं।
यह मामला ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी मीडिया के बीच जारी टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। प्रतिबंध के बाद कई बड़े अमेरिकी टीवी नेटवर्क ने विरोध जताते हुए व्हाइट हाउस की साझा वीडियो कवरेज भी रोक दी थी।
2018 के जिम एकोस्टा मामले का भी जिक्र
मौजूदा विवाद की तुलना 2018 में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा से जुड़े मामले से भी की जा रही है। उस समय जज टिमोथी केली ने व्हाइट हाउस को एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था। अदालत ने माना था कि प्रेस पास वापस लेने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
अब एक बार फिर व्हाइट हाउस और मीडिया से जुड़ा मामला जज केली की अदालत में पहुंचा है। हालांकि, मौजूदा मामले में अदालत ने अभी बैन हटाने का आदेश नहीं दिया है। अब सभी की नजर जज केली के अगले फैसले पर है।
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