
नई दिल्ली। साल 2021 के चर्चित कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले में पूर्व आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े (Sameer Wankhede) को बड़ा झटका (Setback) लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) जारी रखने की अनुमति दे दी है और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण(Central Administrative) के उस आदेश को रद्द (Cancelled) कर दिया है जिसमें उन्हें राहत दी गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ विभागीय जांच आगे बढ़ सकेगी।
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। केंद्र ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें वानखेड़े के खिलाफ केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा जारी आरोपपत्र को निरस्त कर दिया गया था। 18 अगस्त 2025 को जारी इस आरोपपत्र में उनके आचरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
यह मामला 2021 में सामने आए कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स प्रकरण से जुड़ा है जिसमें अभिनेता Shah Rukh Khan के बेटे Aryan Khan का नाम प्रमुखता से उभरा था। आरोप है कि उस समय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में तैनात रहते हुए वानखेड़े ने आर्यन खान को फंसाने की धमकी देकर उनके परिवार से कथित रूप से 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने जांच की दिशा को प्रभावित करने की कोशिश की।
वानखेड़े ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के समक्ष मूल आवेदन दायर कर अपने खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक जांच को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई उचित नहीं है। कैट ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए विभागीय कार्रवाई को निरस्त कर दिया था। हालांकि उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने जनवरी में इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था जिसके बाद केंद्र सरकार ने खंडपीठ का रुख किया।
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि विभागीय जांच को जारी रखने से रोका नहीं जा सकता और कैट का आदेश टिकाऊ नहीं है। अदालत के इस निर्णय से केंद्र सरकार को राहत मिली है और अब संबंधित विभाग समीर वानखेड़े के खिलाफ लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच आगे बढ़ा सकेगा।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कॉर्डेलिया क्रूज प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया है जो पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन चुका था। अदालत के ताजा आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मामले की परतें अभी खुलनी बाकी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
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