
जयपुर । राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Former Rajasthan CM Ashok Gehlot) ने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation based on 2011 Census) महज छलावा है (Is just an Illusion) ।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गहलोत ने दक्षिण भारतीय राज्यों में बढ़ते असंतोष को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगाह करते हुए कहा कि यदि दक्षिण की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो देश में 1950-60 के दशक जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
गहलोत ने बुधवार को यहां एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के संकेतों से स्पष्ट है कि दक्षिण के राज्यों में भारी रोष है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “मैं जानबूझकर दोहरा रहा हूं कि मोदी जी को साउथ की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। अगर वहां के लोगों को लगा कि उत्तर भारत उन पर अपनी मर्जी थोप रहा है और उनकी स्थिति कमजोर की जा रही है, तो स्थिति बिगड़ सकती है। स्टालिन साहब का संकेत बहुत खतरनाक है, उनके दिलों में आग लगी हुई है।”
गहलोत ने सरकार के उस फार्मूले पर भी कड़ा ऐतराज जताया जिसमें 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने की चर्चा है। उन्होंने कहा कि तीन साल पहले संसद में कानून बनते समय सरकार ने कहा था कि 2021 की जनगणना के बाद ही इसे लागू करेंगे, तो अब अचानक 2011 का आधार क्यों? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना किसी ठोस आधार के परिसीमन की चाल चल रही है, जो लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
महिला आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए गहलोत ने इसे एक ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार की नीयत में खोट है। उन्होंने सवाल किया कि जो जनगणना 2021 में होनी चाहिए थी, उसे अब तक क्यों टाला गया? गहलोत ने तंज कसा कि विपक्ष को बदनाम करने के लिए जल्दबाजी में संसद का सत्र बुलाया गया, जबकि विपक्ष ने चुनाव के बाद इसे बुलाने का सुझाव दिया था।
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