कोलकाता। पश्चिम बंगाल (west bengal) की राजनीति में शनिवार को उस वक्त नया विवाद खड़ा हो गया, जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी लोकसभा पहुंचने की तैयारी कर रही हैं। खबर में यह भी कहा गया कि इसके लिए बरहामपुर सीट (Berhampur seat) से टीएमसी सांसद यूसुफ पठान (TMC MP Yusuf Pathan) के इस्तीफे की कोशिश की गई, लेकिन बाद में इस पूरे दावे को सौरव गांगुली और खुद यूसुफ पठान ने खारिज कर दिया।
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि विधानसभा चुनाव में हार और विधायक पद गंवाने के बाद ममता बनर्जी अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए संसद पहुंचना चाहती हैं। इसके लिए बरहामपुर लोकसभा सीट को संभावित विकल्प माना गया, जहां से फिलहाल टीएमसी के टिकट पर पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान सांसद हैं।
खबर के मुताबिक, ममता बनर्जी ने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली से यूसुफ पठान तक संदेश पहुंचाने को कहा था, ताकि वे सांसद पद से इस्तीफा दे दें और उपचुनाव के जरिए ममता वहां से चुनाव लड़ सकें। दावा यह भी किया गया कि यूसुफ पठान ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
रिपोर्ट सामने आते ही बंगाल की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गईं। दरअसल, विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी न केवल मुख्यमंत्री पद से बाहर हुईं, बल्कि भवानीपुर सीट से चुनाव हारने के कारण विधानसभा सदस्य भी नहीं रहीं। ऐसे में उनके संसद में जाने की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी।
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद सबसे पहले सौरव गांगुली ने इस मामले पर सफाई दी। उन्होंने लिखित बयान जारी कर कहा कि ममता बनर्जी ने उनसे कभी भी यूसुफ पठान को कोई राजनीतिक संदेश देने के लिए नहीं कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो सांसद पद छोड़ने से जुड़ी कोई बातचीत हुई और न ही उन्होंने यूसुफ पठान से इस विषय पर संपर्क किया। गांगुली ने यह भी कहा कि वे किसी भी स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं रहे हैं।
इसके बाद टीएमसी सांसद यूसुफ पठान ने भी वीडियो संदेश जारी कर खबर को गलत बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी या पार्टी के किसी नेता ने उनसे सांसद पद छोड़ने को लेकर कोई बातचीत नहीं की है। यूसुफ ने कहा कि हाल की बैठकों में भी ऐसा कोई मुद्दा सामने नहीं आया और बिना आधार के इस तरह की खबरें फैलाना गलत है।
हालांकि, इस विवाद के बीच टीएमसी के भीतर जारी राजनीतिक अस्थिरता की चर्चा भी तेज है। पार्टी के अंदर असंतोष और संभावित टूट की खबरें पहले से सुर्खियों में हैं। बताया जा रहा है कि कई विधायक और कुछ सांसद बागी गुट के संपर्क में हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा है।
लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं। ऐसे में किसी अलग गुट को दल-बदल कानून के तहत वैधता हासिल करने के लिए कम से कम दो-तिहाई यानी 19 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। वहीं राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसद हैं, जहां अलग गुट को मान्यता के लिए नौ सदस्यों का समर्थन आवश्यक माना जाएगा।
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