नई दिल्ली। दुनिया के शेयर बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच अमेरिका की बिगड़ती वित्तीय स्थिति (America’s deteriorating financial situation) ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका पर लगातार बढ़ता कर्ज और सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड आने वाले समय में वैश्विक शेयर बाजारों के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है।
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ने से लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड ऊपर जा रही है। इसका असर सिर्फ अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
जेफरीज के स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वुड के मुताबिक, 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड अगर 5 प्रतिशत से ऊपर जाती है तो यह वैश्विक बाजारों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को दुनिया की वित्तीय व्यवस्था में सुरक्षित निवेश का प्रमुख विकल्प माना जाता है। ऐसे में उनकी यील्ड में तेज बढ़ोतरी होने पर निवेशकों के लिए शेयरों की तुलना में बॉन्ड अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इससे इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट में अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर कई आंकड़े दिए गए हैं। इसके मुताबिक 18 अगस्त तक अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज करीब 40.05 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया था, जो एक साल पहले के मुकाबले 7.8 प्रतिशत अधिक है।
वहीं, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 10 महीनों में अमेरिकी संघीय सरकार का बजट घाटा करीब 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। जुलाई में अकेले सरकार को करीब 432 अरब डॉलर का राजकोषीय घाटा हुआ, जो मार्च 2021 के बाद किसी एक महीने में सबसे बड़ा घाटा बताया गया है।
अमेरिका की वित्तीय चुनौती सिर्फ बढ़ते कर्ज तक सीमित नहीं है। सरकार की आय और खर्च के बीच अंतर भी लगातार बढ़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में अमेरिकी संघीय राजस्व सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत घटा, जबकि पिछले तीन महीनों में इसमें 5.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। टैक्स और टैरिफ से मिलने वाले राजस्व में जुलाई में 8 प्रतिशत और तीन महीने की अवधि में 6.4 प्रतिशत की कमी आई।
इसके विपरीत, सरकारी खर्च तेजी से बढ़ा। जुलाई में कुल संघीय खर्च एक साल पहले की तुलना में 21.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले तीन महीनों में इसमें 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में भी बढ़ती यील्ड निवेशकों की चिंता का कारण बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की नीलामी में यील्ड 4.683 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं, 30-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 5.216 प्रतिशत रही।
लंबी अवधि के बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड इस बात का संकेत मानी जा रही है कि निवेशक अमेरिकी सरकार के बढ़ते कर्ज और भविष्य की वित्तीय स्थिति को लेकर ज्यादा जोखिम प्रीमियम मांग रहे हैं।
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड केवल अमेरिका के निवेशकों के पास नहीं हैं। दुनियाभर के बैंक, पेंशन फंड, बीमा कंपनियां, निवेश फंड और विदेशी सरकारें अमेरिकी ट्रेजरी में बड़ी मात्रा में निवेश करती हैं।
यही वजह है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बदलाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। अगर अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड लगातार बढ़ती है तो इससे दुनिया भर में पूंजी की लागत बढ़ सकती है और निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकाल सकते हैं।
जेफरीज की चेतावनी का सबसे अहम पहलू यही है कि अमेरिका की वित्तीय समस्या अब केवल अमेरिकी सरकार के लिए चिंता का विषय नहीं रह गई है। बढ़ता सरकारी कर्ज, बढ़ता ब्याज खर्च, राजस्व और खर्च के बीच बढ़ता अंतर तथा बॉन्ड यील्ड में उछाल मिलकर वैश्विक निवेश माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे में यदि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर को पार करती है और वहां लंबे समय तक बनी रहती है, तो दुनिया के शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ने का जोखिम बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी कर्ज, सरकारी घाटे और बॉन्ड यील्ड की अगली दिशा पर रहेगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved