
नई दिल्ली। लोकसभा (Lok Sabha) में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) कार्यक्रम के बाद अब अगला पड़ाव नागपुर (Nagpur) हो सकता है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने राहुल गांधी के अगले कार्यक्रम के लिए नागपुर का प्रस्ताव रखा है। पार्टी की रणनीति है कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संवाद के साथ-साथ नागपुर से भाजपा और RSS को राजनीतिक संदेश भी दिया जाए।
नागपुर में कार्यक्रम की तैयारी
नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय है। पुणे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों और युवतियों से संवाद के दौरान भाजपा, RSS और संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा था। ऐसे में नागपुर में ‘छात्रों की गूंज’ का आयोजन होने पर उनके राजनीतिक हमले और ज्यादा चर्चा में आ सकते हैं।
महाराष्ट्र कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए पहले पुणे, नागपुर और लातूर को संभावित स्थानों के तौर पर चुना गया था। उनका कहना है कि पुणे के बाद अब नागपुर में कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए।
हालांकि, कांग्रेस के रणनीतिकारों के बीच राहुल गांधी के अगले कार्यक्रम को लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार के नाम पर भी चर्चा है। कार्यक्रम को लेकर गठित समिति की जल्द बैठक होने की संभावना है, जिसके बाद अगला स्थान तय किया जाएगा।
छात्रों के मुद्दों पर केंद्रित है अभियान
‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत कोटा से हुई थी। इसके बाद यह देहरादून और प्रयागराज होते हुए पुणे पहुंचा। अभियान के जरिए शिक्षा, रोजगार, महिला सुरक्षा और न्याय जैसे मुद्दों को युवाओं के बीच उठाया जा रहा है।
पुणे में महिलाओं के मुद्दों पर बोले राहुल
पुणे में राहुल गांधी ने महिलाओं, खासकर युवतियों को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि उन्हें पितृसत्तात्मक सोच से लगाए गए प्रतिबंधों से मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर कई आंकड़ों का भी उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि करीब 60 प्रतिशत लड़कियों और महिलाओं को अकेले बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती, जबकि करीब 45 प्रतिशत लड़कियों को शादी या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई अथवा नौकरी छोड़नी पड़ती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि केवल 8 प्रतिशत महिलाओं के नाम पर संपत्ति है और करीब 85 प्रतिशत महिलाओं को नौकरी या व्यवसाय शुरू करने के लिए परिवार की अनुमति की जरूरत पड़ती है।
घरेलू काम और यौन उत्पीड़न का भी मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता ने कहा कि महिलाओं से अक्सर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा परिवार को देने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने दावा किया कि यौन उत्पीड़न के करीब 99 प्रतिशत मामले सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और न्याय मिलने को लेकर अनिश्चितता के कारण दर्ज नहीं होते।
राहुल गांधी ने घरेलू काम में लैंगिक असमानता का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, 15 से 29 वर्ष की लड़कियां रोजाना औसतन करीब साढ़े पांच घंटे घरेलू काम करती हैं, जबकि लड़के ऐसे कामों में करीब आधा घंटा ही देते हैं।
अब नजर कांग्रेस की अगली बैठक पर है। अगर नागपुर को कार्यक्रम के लिए मंजूरी मिलती है, तो RSS मुख्यालय वाले शहर में राहुल गांधी का यह कार्यक्रम राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से अहम माना जा सकता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved